जम्मू-कश्मीर में सीमापार से हो रही गोलीबारी का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने शनिवार को पाकिस्तान के दो सैनिकों को मार गिराया। पाकिस्तान के लिए परिस्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि उसे अपने सैनिकों के शव ले जाने के लिए मजबूरन सफेद झंडा दिखाना पड़ा। सैन्य भाषा में सफेद झंडा आत्मसमर्पण या युद्ध विराम का संकेत है।
पीओके के हाजीपुर सेक्टर में 10-11 सितंबर को संघर्ष विराम उल्लंघन का जवाब देते हुए भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में सिपाही गुलाम रसूल की मौत हो गई। सिपाही पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के बहावलनगर का था। शुरुआत में पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी कर रसूल के शव को ले जाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया।
इस दौरान पाक सेना का एक और जवान भी मारा गया। दो दिन तक कोशिश करने के बावजूद पाक सेना दोनों सैनिकों के शव हासिल नहीं कर सकी। सूत्रों के मुताबिक, 13 सितंबर को पाक सेना को मजबूरन सफेद झंडा दिखाकर शव ले जाना पड़ा। भारतीय सेना ने भी मारे गए सैनिकों का सम्मान करते हुए पाक सेना को शव ले जाने की इजाजत दे दी।
पाक सेना में पंजाबी मुस्लिम जवानों का दबदबा
ऐसा नहीं है कि पाक सेना को अपने सभी सैनिकों के शवों की ऐसी ही चिंता रहती है। हाल में ही केरन सेक्टर में 30-31 जुलाई को पाकिस्तान के 5 से 7 सैनिक और आतंकवादी मारे गए थे। लेकिन पाकिस्तानी सेना ने शवों को वापस लेने से इनकार कर दिया था।
ऐसा माना जा रहा है कि मारे गए सैनिक पंजाब से नहीं थे। वे या तो कश्मीर से थे या नॉर्दन लाइट इन्फैंट्री के थे। पाक सेना में पंजाबी मुस्लिमों का दबदबा है, इसलिए वे अन्य सैनिकों को अहमियत नहीं देते। पाक सेना में 70 फीसदी जनरल पंजाबी मुस्लिम हैं।