जनरल कमर जावेद बाजवा के पाकिस्तान के नए आर्मी चीफ चुने जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत के प्रति उनका नजरिया क्या होगा? यह सवाल इसलिए भी मौज्जू हो जाता है क्योंकि वर्तमान में भारत पाक सीमा पर जैसे तनाव के हालात बने हुए हैं और दोनों देशों की फौजें एक दूसरे के सामने हैं ऐसे में नए जनरल की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है।
मौजूदा हालातों में पाक में नए सेना प्रमुख को तीन संदर्भों में देखा जाना चाहिए। पहला भारत के नजरिए से। भारत की बात की जाए तो आमजन और राजनीतिक नेतृत्व भी अभी जनरल बाजवा के बारे में कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं है, वह सिर्फ वेट एंड वाच की भूमिका में है।
पूर्व भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह भी इसी से इत्तेफाक रखते हैं कि अभी इस मुद्दे पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा इसलिए अभी भारत को सिर्फ इंतजार करना होगा। हालांकि वह चौकन्ना होने की सलाह जरूर देते हैं, उसकी वजह तो शायद ही बताने की जरूरत हो।
कश्मीर मुद्दे पर अभी भी टिकी है नवाज शरीफ की निगाह
दूसरी ओर पाकिस्तान के नजरिए से देखा जाए तो साफ है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जिस तरह दो अन्य सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल के ऊपर तरजीह देकर कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ बाजवा को सेना प्रमुख बनाया है वो उनका एजेंडा साफ कर देता है।
पिछले कुछ समय में अपने देश में जिस तरह नवाज शरीफ कमजोर पड़े हैं उसके बाद से कश्मीर को लेकर उनका रुख भारत के प्रति लगातार आक्रामक बना हुआ है।
शायद कश्मीर के बहाने वह अपने देशवासियों को भावनात्मक रूप से अपने साथ जोड़ा रखना चाहते हैं क्योंकि पाकिस्तान की बहुतायत वाली कट्टरपंथियों की जमात में कश्मीर आज भी सबसे जरूरी मुद्दा है।
ऐसे में साफ है कि कश्मीर एक्सपर्ट जनरल बाजवा के साथ नवाज शरीफ अभी भी अपने देशवासियों को इस मुद्दे पर उलझाए रखने के पक्ष में हैं। यहां यह भी नहीं भूलना चाहिए कि नवाज शरीफ ने बाजवा की नियुक्ति वर्तमान जनरल राहिल शरीफ की सलाह पर ही की है।
घरेलू आतंकवाद के प्रति कड़ा रुख रखते हैं बाजवा
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है खुद जनरल कमर जावेद बाजवा। आमतौर पर लो प्रोफाइल रहने वाले बाजवा शांत रहकर ही अपना काम करना पसंद करते हैं। हालांकि उनके और पूर्व जनरल राहिल शरीफ में एक बड़ी समानता है कि बाहरी मुकाबले से ज्यादा चिंता दोनों अधिकारियों को घरेलू आतंकवाद की है जिससे उनका देश बुरी तरह जूझ रहा है।
अपने पूरे कार्यकाल के दौरान राहिल शरीफ ने घरेलू आतंकवाद का कड़ाई से मुकाबला किया और काफी हद तक उस पर सफलता भी पाई। कुछ इसी फितरत के हैं जनरल बाजवा जो घरेलू आतंकवाद के प्रति सख्त रुख रखते हैं।
पूर्व में अपने बयानों में वह अपनी इस चिंता को सबके सामने साझा भी कर चुके हैं और अगर वो आगे भी अपनी इस नीति पर बने रहते हैं तो यह भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
पूर्व भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह जनरल बाजवा को बहुत ज्यादा पेशेवर मानते हैं, ऐसे में उम्मीद है की जा सकती है कि वह इस मुद्दे को भावनात्मक की बजाय व्यवहारिक रूप से हल करने का प्रयास करेंगे।