पहलगाम में पिछले साल हुआ आतंकी हमला आज भी 26 मासूम जिंदगियों के खून का दर्द बनकर पीड़ित परिवारों को झुलसा रहा है। कल इस जघन्य आतंकी हमले का एक साल पूरा होने जा रहा है और आज भी पीड़त परिवारों की आंखें नम हैं। वो उस समय को आज भी कोस रहे हैं। उनका बयान उनके जीवन के दर्द और संघर्ष को साफ-साफ बता रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की वादियों में हुआ आतंकी हमला आज भी दर्द की ऐसी आग बनकर जल रहा है, जिसकी तपिश एक साल बाद भी पीड़ित परिवारों के दिलों को झुलसा रही है। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में 26 मासूम जिंदगियां पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की गोलियों का शिकार बनीं और एक हंसता-खेलता माहौल खून से लाल हो गया। आज भी पीड़ित परिवार उस काले दिन को भूल नहीं पाए हैं और हर याद के साथ उनका दर्द और गहरा हो जाता है।
पति के जाने के बाद परिवार संभाल रही प्रशांत सतपथी की पत्नी
वहीं दूसरे पीड़ित प्रशांत कुमार सतपथी की पत्नी प्रियदर्शिनी आचार्य ने बताया कि इस हमले ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। पति के जाने के बाद घर का सहारा छिन गया और अब उन्हें अपने परिवार को चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो नौकरी और आर्थिक मदद देने का वादा किया था, उसमें से कुछ मदद तो मिली है, लेकिन सरकारी नौकरी अभी तक नहीं दी गई है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वादे के अनुसार जल्द से जल्द नौकरी और पूरी सहायता दी जाए ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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