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'यह जख्म जिंदगी भर नहीं भरेगा': आज भी नम है पीड़ित परिवारों की आंखें, पहलगाम हमले की बरसी से पहले छलका दर्द

Tue, 21 Apr 2026 10:54 AM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पहलगाम में पिछले साल हुआ आतंकी हमला आज भी 26 मासूम जिंदगियों के खून का दर्द बनकर पीड़ित परिवारों को झुलसा रहा है। कल इस जघन्य आतंकी हमले का एक साल पूरा होने जा रहा है और आज भी पीड़त परिवारों की आंखें नम हैं। वो उस समय को आज भी कोस रहे हैं। उनका  बयान उनके जीवन के दर्द और संघर्ष को साफ-साफ बता रहा है।

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पहलगाम आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की वादियों में हुआ आतंकी हमला आज भी दर्द की ऐसी आग बनकर जल रहा है, जिसकी तपिश एक साल बाद भी पीड़ित परिवारों के दिलों को झुलसा रही है। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले में 26 मासूम जिंदगियां पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की गोलियों का शिकार बनीं और एक हंसता-खेलता माहौल खून से लाल हो गया। आज भी पीड़ित परिवार उस काले दिन को भूल नहीं पाए हैं और हर याद के साथ उनका दर्द और गहरा हो जाता है।

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कल इस जघन्य आंतकवादी हमले की पहला बरसी है। ऐसे में इस हमले में जान गवाने वाले कस्तुभ गनबोटे की पत्नी संगीता गनबोटे की आवाज में आज भी उनका दुख साफ झलकता है, जो कहती हैं कि यह जख्म जिंदगी भर नहीं भर सकता। यह सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए उजाड़ देने वाली त्रासदी थी, जिसकी टीस आज भी उतनी ही तेज है।

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कस्तुभ गनबोटे की पत्नी का छलका दर्द
कस्तुभ गनबोटे की पत्नी संगीता गनबोटे ने बताया कि यह घटना मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक पल है और मैं इसे आखिरी सांस तक नहीं भूल पाऊंगी। उन्होंने बताया कि पति की मौत के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है और वे लगातार गहरे दुख में जी रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह आम लोगों की हत्या से किसी भी समस्या का हल नहीं निकलता।

उनका कहना है कि अगर किसी की कोई लड़ाई है तो उसे सरकार से बातचीत करनी चाहिए, निर्दोष लोगों को निशाना बनाना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए स्कूलों में बच्चों को जागरूक करना चाहिए कि ऐसी स्थिति में कैसे व्यवहार करना है।

पति के जाने के बाद परिवार संभाल रही प्रशांत सतपथी की पत्नी 
वहीं दूसरे पीड़ित प्रशांत कुमार सतपथी की पत्नी प्रियदर्शिनी आचार्य ने बताया कि इस हमले ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। पति के जाने के बाद घर का सहारा छिन गया और अब उन्हें अपने परिवार को चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो नौकरी और आर्थिक मदद देने का वादा किया था, उसमें से कुछ मदद तो मिली है, लेकिन सरकारी नौकरी अभी तक नहीं दी गई है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वादे के अनुसार जल्द से जल्द नौकरी और पूरी सहायता दी जाए ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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भारत ने किया पलटवार, ऑपरेशन सिंदूर
गौरतलब है कि भारत ने इस आतंकी हमले के जवाब में पिछले साल 2025 में 6-7 मई की दरमियानी रात को आतंकियों का पनाहगाह पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत जवाबी हमला किया। इस हमले में भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों पर जोरदार बम बरसाए। सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। हालांकि अब एक साल बाद कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ी है। लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह घाव आज भी ताजा है और उनका दर्द समय के साथ कम नहीं हुआ है।

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