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Mani Shankar Aiyar: 'पहलगाम' पर जिन्ना का जिक्र कर अय्यर बोले- 1971 में बना बांग्लादेश, आज मुस्लिमों से सवाल..

Sun, 27 Apr 2025 03:17 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए मणिशंकर अय्यर ने देश विभाजन और मोहम्मद अली जिन्ना के साथ-साथ महात्मा गांधी और पंडित नेहरू का भी नाम लिया। इतिहास की घटनाओं का जिक्र कर अय्यर ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का हवाला देते हुए कई अहम सवाल पूछे। पत्रकार, पूर्व राजनयिक और केंद्रीय मत्री रह चुके अय्यर ने कहा कि किसी भी मुसलमान से पूछिए और आपको सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
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मणिशंकर अय्यर (फाइल) - फोटो : ANI
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को हुआ नृशंस आतंकी हमला देश-दुनिया में लगातार चर्चा और चिंता का कारण बना हुआ है। इस आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले दहशतगर्दों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सजा ऐसी मिलेगी जिसकी आतंकियों ने कल्पना भी नहीं की होगी। अब ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पहलगाम हमले को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने पूछा है कि क्या पहलगाम की आतंकी वारदात के पीछे देश विभाजन (1947 में हुए भारत पाकिस्तान बंटवारे) के अनसुलझे सवालों का प्रतिबिंब दिखाई देता है?
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मणिशंकर अय्यर ने यह टिप्पणी एक पुस्तक विमोचन के दौरान की। इस समारोह में देश के सेवानिवृत्त नौकरशाह और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) वजाहत हबीबुल्लाह, जम्मू-कश्मीर के पहले राज्यपाल डॉ कर्ण सिंह जैसी हस्तियां भी मौजूद रहीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अय्यर ने कहा, उस समय देश के सामने जो प्रश्न था और आज भी वही प्रश्न है। क्या भारत में मुसलमान खुद को स्वीकार्य, पोषित और सम्मानित महसूस करते हैं?

पुस्तक विमोचन के समय पूर्व नौकरशाह वजाहत हबीबुल्लाह, कांग्रेस नेता डॉ कर्ण सिंह,मणिशंकर अय्यर व अन्य - फोटो : पीटीआई
प्रवीण डावर की पुस्तक 'ही ऑलमोस्ट प्रिवेंटेड पार्टिशन-द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ डॉ. एमसी डावर' (He Almost Prevented Partition-The life and times of Dr MC Davar) के विमोचन के समय अय्यर ने कहा, कई लोगों ने विभाजन को लगभग रोक दिया था, लेकिन ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देश के मूल्यों और भारत की राष्ट्रीयता की प्रकृति और इसकी सभ्यतागत विरासत के आकलन में तत्कालीन दिग्गजों की राय अलग-अलग थी। अय्यर ने कहा कि महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और कई अन्य मुसलमान की राय अलग थी। जिन्ना और इन लोगों के बीच मतभेद थे। 

1971 में बांग्लादेश का गठन, अब भी कई अनसुलझे सवाल
अय्यर ने कहा, तमाम लोगों की राय अलग होने के बावजूद सच्चाई यही है कि बंटवारा हुआ और आज तक हम उस विभाजन के परिणामों के साथ जी रहे हैं। सवाल यह है कि क्या हमें इसी तरह जीना चाहिए? क्या 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमला बंटवारे के अनसुलझे सवालों के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद उपमहाद्वीप में मुसलमानों का रक्षक बनने का पाकिस्तान के सपने पर पानी फिर गया। बांग्लादेश अलग देश बन गया।

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केवल मुसलमान होना ही पर्याप्त नहीं, बंगाली होना भी जरूरी
1971 के विभाजन का उल्लेख करते हुए अय्यर ने कहा, 1971 में पाकिस्तान की आधी से अधिक आबादी और उसका बहुत महत्वपूर्ण भूभाग जानबूझकर पाकिस्तान से अलग कर दिया गया था। इसका आधार ये बात बना कि केवल मुसलमान होना ही पर्याप्त नहीं, बंगाली होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोग यह समझने में असफल रहे कि हर मुक्ति के बाद मिली पहचान के एक से अधिक आयाम होते हैं। 1971 में पाकिस्तान के साथ यही हुआ। वह भारत में रहने वाले मुस्लिमों के लिए भी मातृभूमि बनना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

क्या हम जिन्ना के नजरिए को स्वीकार करते हैं?
मणिशंकर अय्यर ने 1971 से पहले के कालखंड को लेकर कहा, उस समय भारत के सामने यही सवाल था कि लगभग 10 करोड़ मुसलमानों के साथ क्या किया जाए। यही  वास्तविक प्रश्न आज भी उसे परेशान कर रहा है कि अब लगभग 20 करोड़ मुसलमानों के साथ क्या किया जाए? उन्होंने कहा, हमें सोचना होगा कि क्या हम जिन्ना के नजरिए को स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि मुसलमानों के लिए अलग देश बन चुका है? क्या हम मुस्लिमों को हमारे बीच तोड़फोड़ करने वाले या संभावित खतरे के रूप में देख रहे हैं।

क्या हमारी पहचान का केवल एक ही आयाम?
बकौल अय्यर हमारे सामने दूसरा पहलू यह है कि क्या हम उन्हें (मुस्लिमों) को देखकर कहते हैं कि 'वे हमारे अभिन्न अंग हैं'? क्या हम खुद को समग्र रूप में परिभाषित करते हैं ? उन्होंने कहा, क्या हम ये मानते हैं कि हमारी पहचान का केवल एक ही आयाम है और वह हिंदू धर्म का धार्मिक आयाम है?  उन्होंने पूछा, क्या वर्तमान भारत में क्या मुसलमान यह महसूस करता है कि उसे स्वीकार किया जा रहा है? क्या उसे एहसास हो रहा है कि उसका ध्यान रखा जा रहा है? क्या मुसलमान यह महसूस करता है कि उसे भी सम्मान दिया जा रहा है? बकौल अय्यर, हमें इन सवालों का जवाब तलाशना होगा। किसी भी मुसलमान से पूछिए और आपको जवाब मिल जाएगा।

कब और कहां हुई आतंकी वारदात, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री क्या बोले
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विटरलैंड’ नाम से मशहूर पर्यटन स्थल पर मंगलवार दोपहर हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद घाटी में हुआ सबसे घातक हमला है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि 26 मृतकों में दो विदेशी और दो स्थानीय निवासी हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आतंकी हमले को 'हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए किसी भी हमले से कहीं बड़ा' हमला बताया। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत की यात्रा पर हैं। इसी समय जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और ट्रैकिंग का मौसम जोर पकड़ रहा है।
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74 महीने बाद आतंकी हमले से दहली घाटी
2019 की फरवरी में जम्मू-कश्मीर के ही पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला पहलगाम में हुआ है। पहलगाम शहर से लगभग छह किलोमीटर दूर बैसरन चीड़ के पेड़ों के घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा एक विशाल घास का मैदान है तथा देश व दुनिया के पर्यटकों के बीच पसंदीदा स्थान है।

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आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी
पहलगाम हमले के संबंध में अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हथियारबंद आतंकवादी 'मिनी स्विट्जरलैंड' में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
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