मन में खुशियां थीं... बायसरन घाटी में कोई शादी के बाद नई जिंदगी के लिए सपने सजा रहा था तो कोई अपने जीवन के कैनवास में यादों के रंग भर रहा था। इस बीच आतंकियों की कायराना हरकत ने सारे सपनों और उम्मीदों को तोड़ दिया। जीवन की सबसे अच्छी यादों में खुशियों की जगह खून के रंग भरने लगे। कुछ देर पहले तक जिस माहौल में हंसी थीं, वहां चीत्कार गूंजने लगी। गोलियों की आवाज के बीच सिसकियां और जान बचाने की गुहार थी। आतंकियों की गोलियों की बौछार के बीच जब उनके अपने दम तोड़ने लगे तो बस जुबां से यही निकला कि... हमें बख्श दो। पीड़ितों की सिसकियां और मायूसी आतंक के मंजर को बयां कर रही हैं। आइए जानते हैं उन परिवारों की कहानी, जिनकी इस हमले में खुशियां खो गईं...