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पहलगाम हमला: तीन पाकिस्तानी दहशतगर्द... 3000 रुपये और रेकी की वो 3 बातें, जो आतंकियों को ले गई 'बायसरन घाटी'

Thu, 28 Aug 2025 07:36 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एनआईए के सूत्रों के अनुसार, पहलगाम हमले में तीन ही आतंकी शामिल थे। पाकिस्तान के इन्हीं तीनों आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया था। हालांकि बाद में 'ऑपरेशन महादेव' में इन तीनों आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था।
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पहलगाम आतंकी हमला - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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जम्मू कश्मीर के पहलगाम की बायसरन घाटी में जिन पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को मार दिया था, उनकी संख्या तीन थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' ने पहली बार यह खुलासा किया है। जिस जगह पर हमले को अंजाम दिया गया, उसके निकट ही आतंकियों ने दो लोकल लोगों से मदद ली थी। इसके लिए बाकायदा, दो ओवरग्राउंड वर्करों को दहशतदर्गों की तरफ से तीन हजार रुपये दिए गए थे। इतना ही नहीं, एनआईए सूत्रों ने यह खुलासा भी किया है कि पाकिस्तानी दहशतगर्दों ने तीन कारणों से पहलगाम आतंकी हमले के लिए 'बैसरन घाटी' को चुना था। 

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एनआईए के सूत्रों के अनुसार, पहलगाम हमले में तीन ही आतंकी शामिल थे। पाकिस्तान के इन्हीं तीनों आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया था। हालांकि बाद में 'ऑपरेशन महादेव' में इन तीनों आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। इस ऑपरेशन के बाद एनआईए ने पहली बार यह आधिकारिक बयान दिया है कि यही वे तीनों आतंकी थे, जिन्होंने पहलगाम में निर्दोष लोगों की जान ली थी। एनआईए ने जब इस केस की जांच शुरु की थी तो यह स्पष्ट होने में काफी समय लग गया कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की सही संख्या कितनी थी। कभी चार तो कभी पांच दहशतगर्दों के शामिल होने की बात सामने आई। एनआईए ने लंबी पूछताछ के बाद यह पुष्टि की है कि हमलावरों की संख्या तीन ही थी। 

एनआईए के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकियों ने अपने हैंडलरों की मदद से यह प्लानिंग की थी कि इस हमले के लिए पहलगाम की 'बायसरन' घाटी ठीक रहेगी। इसके लिए लंबे समय तक रेकी की गई। रेकी में लोकल ओवरग्राउंड वर्करों की मदद ली गई। यह पता लगाया कि पहलगाम सिटी से यहां तक पहुंचने में कितना समय लगता है। आम लोग कितनी देर में पहुंचते हैं और सुरक्षा बलों की पहुंच कितने समय में संभव है। इस घाटी तक पहुंचने के कितने रास्ते हैं। आतंकियों ने पता लगाया कि इस घाटी तक तेज गति से पहुंचना आसान नहीं है। 
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वजह, कोई सड़क मार्ग तो यहां पर है नहीं। दूसरा, खच्चर या घोड़ों की मदद से ही यहां तक पहुंचा जा सकता है। सुरक्षा बल, विशेष स्कूटर जैसे वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें भी यहां तक पहुंचने में लगभग तीस मिनट लग जाते हैं। पर्यटकों को 45 मिनट से ज्यादा समय लगता है। इसके अलावा आतंकियों ने यह भी मालूम किया कि इस घाटी की पहचान छिपी रहती है। यह लोगों के बीच ज्यादा सार्वजनिक नहीं है। 

बायसरन घाटी एक एकांत इलाका है
एनआईए यह भी पता लगा रही है कि क्या आतंकियों के पास ऐसे फोन थे, जो दूसरे देश के मोबाइल नेटवर्क की मदद से चलते थे। गिरफ्तार किए गए दो ओजीडब्ल्यू के खिलाफ जांच एजेंसी द्वारा जल्द ही आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीनों आतंकवादी, पाकिस्तानी थे। संसद सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 जुलाई को यह पुष्टि की थी। पहलगाम के आतंकियों के कब्जे से जो दस्तावेज मिले हैं, वे हमलावरों की राष्ट्रीयता को संदेह से परे साबित करते हैं। ऑपरेशन महादेव के दौरान आतंकवादी (सुलेमान शाह उर्फ फैजल जट्ट, अबू हमजा उर्फ अफगान और यासिर उर्फ जिब्रान मारे गए थे। 

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