आज पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हुआ। इसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इस्राइल के राजदूत रूवेन अजार ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में इस्राइल भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।
पहलगाम आतंकी को आज एक साल पूरे हो गए हैं। जब आतंकी हमला हुआ था तब पूरे विश्व ने इस हमले की निंदा की थी। आज भारत में इस्राइल के राजदूत रूवेन अजार इस आतंकी हमले को याद किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में तेल अवीव नई दिल्ली के साथ खड़ा है।
एक्स पर पोस्ट करके अजार ने कहा, पहलगाम आतंकी हमले में 26 बेकसूर लोगों की जान जाने की दुखद घटना को एक साल हो गया है। हम उन्हें याद करते हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में इस्राइल भारत के साथ खड़ा है।
इस्राइल ने भी झेली है पहलगाम जैसी क्रूरता
उन्होंने एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और 7 अक्टूबर को इस्राइल द्वारा झेली गई क्रूरता से इसकी तुलना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती और इस खतरे का सामना करने में भारत और इस्राइल एकजुट हैं।
पहलगाम आतंकी हमला 22 अप्रैल, 2025 को हुआ था, जब पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए एक क्रूर नरसंहार में 26 लोग मारे गए थे। इस हमले को द रेजिस्टेंस फ्रंट ने अंजाम दिया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक हिस्सा है।
विश्व सिन्धी कांग्रेस (WSC) के चेयरमैन डॉ. लखू लुहाना ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए पीड़ितों को याद किया और इस हमले की कड़ी निंदा की। डॉ. लुहाना ने कहा, पहलगाम हमले की पहली बरसी के इस गंभीर मौके पर, हम उन बेकसूर लोगों को गहरे दुख के साथ याद करते हैं, जिनकी जान इस हिंसा की बेमतलब घटना में चली गई, और उन परिवारों को भी याद करते हैं, जिन पर इस घटना का गहरा और कभी न मिटने वाला जख्म लगा है।
उन्होंने आगे कहा, हम इस क्रूर हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसने इंसानियत और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बुनियाद पर ही हमला किया है। ऐसे कृत्यों की किसी भी समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए और इन्हें बिना किसी शर्त के पूरी तरह से खारिज किया जाना चाहिए, चाहे इनका मकसद या बहाना कुछ भी क्यों न हो।
हमले के जवाब में चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर
हमलावरों ने पीड़ितों से उनका धर्म पूछकर उन्हें अलग किया और गैर-मुसलमानों की पहचान करने के लिए उन्हें इस्लामिक कलमा पढ़ने पर मजबूर किया। मारे गए लोगों में 25 पर्यटक और एक स्थानीय पोनी राइड' (घोड़े की सवारी कराने वाला) ऑपरेटर शामिल था, जिसने पर्यटकों को बचाने की कोशिश की थी।
इस हमले के जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 6 और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, यह एक केंद्रित, नपा-तुला और तनाव न बढ़ाने वाला सैन्य अभियान था, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादियों के अहम ठिकानों को निशाना बनाना था।