विवाद थामने के लिए सेंसर बोर्ड की पहल और सर्वोच्च न्यायालय के फरमान के बाद तमाम राज्य सरकारों के पद्मावत विरोध की स्थिति से निपटने के लिए हाथ-पांव फूल रहे हैं। तो संघ ने पद्मावत विरोधियों के साथ की बात कही है। राजस्थान क्षेत्र के एक अन्य संघचालक डॉ. भगवती प्रकाश ने कहा है कि अपने उद्दात्त, प्रेरक इतिहास के प्रति संघ सदैव आग्रही रहा है और इसलिए संघ के स्वयंसेवक सहज ही ऐसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर समाज के साथ सहभागी होकर अग्रसर होते ही हैं। उनके इस बयान को पद्मावत विरोधियों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
राजपूत मतों पर है भगवा परिवार की नजर
दरअसल पद्मावत का विरोध कर भगवा परिवार राजपूत बिरादरी के मतों को नाराज करने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि रणनीति के तहत जहां भाजपा शासित राज्यों ने पद्मावत के विरोध को देखते हुए अपने-अपने राज्यों में फिल्म बैन किया था। मगर सर्वोच्च न्यायालय ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। अब भी राजस्थान, मध्यप्रदेश और हरियाणा सरीखे राज्यों ने सर्वोच्च न्यायालय समेत तमाम माध्यमों से कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
उत्तर भारत के राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर भाजपा के खिलाफ बताई जा रही है। तो निकाय चुनाव के नतीजे मध्यप्रदेश में भी भाजपा के लिए सुखद नहीं प्रतित हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ ने भी पद्मावत के विरोध में कदम रखा है। ताकि इसके जरिए संगठन के कार्यकर्ताओं में जुनून पैदा किया जा सके। फिल्म को वे समाज और संस्कृति के विरूद्ध साजिश के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।