राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। इससे पहले इन पुरस्कारों के विजेताओं ने रविवार को खुशी जाहिर की है। डॉ. रामचंद्र गोडबोले को पद्म श्री के लिए नामित किया गया है। उन्होंने कहा, हम जो खुशी महसूस कर रहे हैं, उसकी कोई तुलना नहीं है। पद्म पुरस्कार प्राप्त करना हमारे लिए गर्व की बात है। हमारा फोकस हमेशा आदिवासी बच्चों और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई पर रहा है। इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना जरूरी है। कुपोषण से लड़ाई लंबी और कठिन है, जिसमें सभी की भागीदारी जरूरी है।
दंतेवाड़ा की बदली पहचान: सुनीता गोडबोले
वहीं, चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने के लिए आयुर्वेद चिकित्सक सुनीता गोडबोले को भी कल पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा, यह पुरस्कार चिकित्सा क्षेत्र में दिया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा मैं महिला संगठनों से जुड़ी रही हूं। मैं केवल डॉक्टर नहीं बल्कि एक समाजसेवी भी हूं। हमने जो काम किया है, उसे अब अधिक पहचान मिलेगी। जो दंतेवाड़ा कभी नक्सलवाद के लिए बदनाम था, अब स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, वन विकास और वन आधारित आजीविका के लिए जाना जाएगा। यह मेरे लिए बहुत संतोष की बात है।
भारत से गहरा जुड़ाव: लार्स-क्रिश्चियन
डॉ. लार्स-क्रिश्चियन को कल कला क्षेत्र में पद्म श्री सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा, यह पुरस्कार मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मुझे भारत से गहरा प्रेम है। मैं लंबे समय तक भारत में रहा और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इस तरह का सम्मान मिलेगा। इसलिए यह मेरे लिए सुखद आश्चर्य है। भारत से मेरा जुड़ाव भारतीय संगीत सीखने और जर्मनी में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक कार्य करने से शुरू हुआ। पश्चिम बंगाल के मेरे शिक्षक ने मुझे भारतीय संस्कृति, खासकर बंगाली परंपराओं से परिचित कराया, जिसने मेरे जीवन और व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल दि या।
सम्मान से आसपास के लोगों को खुशी दी: तृप्ति मुखर्जी
पद्म श्री 2026 से सम्मानित कांथा कढ़ाई कलाकार तृप्ति मुखर्जी ने कहा, मुझे पद्म श्री से सम्मानित किए जाने पर बहुत खुशी है। इस पुरस्कार ने न केवल मुझे बल्कि मेरे आसपास के लोगों को भी खुशी दी है।
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भारत सरकार ने मेरी मेहनत की सराहना की: चुन्नीलाल पांड्या
कला क्षेत्र में पद्म श्री 2026 से सम्मानित धार्मिकलाल चुन्नीलाल पांड्या ने कहा, पद्म श्री पुरस्कार पाकर मैं बहुत खुश हूं। भारत सरकार ने इतने वर्षों की मेरी मेहनत की सराहना की है। मैं अपना आभार शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। मैंने 25 साल की उम्र में काम शुरू किया था और आज 94 वर्ष की आयु में भी काम कर रहा हूं।
यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष जगदीश कुमार ने क्या कहा?
पद्म श्री 2026 से सम्मानित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कहा, मैं लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा हूं और आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में काम कर चुका हूं। मैंने बहुत करीब से देखा है कि हमारे देश में उच्च शिक्षा किस तरह आगे बढ़ी है। वर्ष 2020 में नई शिक्षा नीति लागू की गई, जिसके बाद विद्यालयी और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में कई सुधार किए गए। वर्ष 2022 में मैंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला, जिससे मुझे देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को करीब से समझने और कई सुधार लागू करने का बड़ा अवसर मिला।