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आपत्ति के बावजूद चिदंबरम लाए थे 80:20 गोल्ड स्कीम, पीएसी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Thu, 08 Mar 2018 05:42 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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पी चिदंबरम - फोटो : PTI
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पी चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते 2013 में लॉन्च की गई 80:20 गोल्ड आयात स्कीम को लेकर राजस्व खुफिया महानिदेशालय (डीआरआई) ने आपत्ति की थी, लेकिन इसके बावजूद उसे लागू किया गया। लोक लेखा समिति (पीएसी) की एक उप समिति के सदस्यों को वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।
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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली इस उप समिति ने तत्कालीन वित्त मंत्री द्वारा इस स्कीम को लांच करने की प्रक्रिया की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश करने का फैसला किया है। 

सूत्रों के अनुसार डीआरआई ने इस आधार पर इस स्कीम का विरोध किया था कि इससे काले धन की राउंड ट्रिपिंग (काला धन को सफेद बनाना) और मनी लांड्रिंग को बढ़ावा मिलेगा। 
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गौरतलब है कि अगस्त, 2013 में लांच की गई इस स्कीम के तहत व्यापारियों को इस शर्त के साथ सोना आयात करने की अनुमति दी गई थी कि वे पिछले आयात के 20 फीसदी सोने का निर्यात करेंगे। सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार ने नवंबर, 2014 में इस स्कीम को बंद कर दिया था।
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सरकारी खजाने को एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान

मेहुल चोकसी और नीरव मोदी
मालूम हो कि पिछले हफ्ते स्वर्ण आयात पर 2016 की सीएजी रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान उप समिति के सदस्यों ने भगोड़े मेहुल चोकसी एवं अन्य ज्वेलरों द्वारा 80:20 गोल्ड आयात स्कीम के तथाकथित दुरुपयोग में चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

इस मामले में राजस्व सचिव और प्रवर्तन निदेशालय, सीबीडीटी एवं सीबीईसी के शीर्ष अधिकारी उप समिति के सामने पेश हुए थे। 

सदस्यों ने इस बात को रेखांकित किया कि इस स्कीम के कारण खजाने को एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार ज्वेलरों की एक डॉलर की आय के लिए सरकार को 221.75 रुपये के शुल्क का नुकसान उठाना पड़ा।
 
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