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MSME Sector: देश में करोड़ों नौकरियां देने वाले इस सेक्टर को लगी 'नजर', बर्बादी में क्यों लिया जा रहा है चीन का नाम?

सार

पी. चिदंबरम के मुताबिक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र या गुजरात, हर एक राज्य में एमएसएमई बंद पड़े हुए हैं। इसके दो कारण हैं। पहला तो जीएसटी है और दूसरा कारण चीन से बढ़ा आयात है। दोनों ने एक साथ एमएसएमई का बिल्कुल सत्यानाश कर दिया है...
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एमएसएमई सेक्टर - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पिछले पांच सालों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी 'एमएसएमई' सेक्टर, जहां से देश में करोड़ों नौकरियों का पिटारा खुलता था, अब उसे किसकी बुरी नजर लग गई है। क्या ये सेक्टर अब पूरी तरह बर्बाद हो रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने यह बात कही है। शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता में रमेश ने कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा, मोटे तौर से पांच साल के बाद हम ये कह सकते हैं कि जीएसटी से हमारे जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं, एमएसएमई सेक्टर हैं, वे बिल्कुल खत्म हो गए हैं। देश के निर्यात में करीब 50 फीसदी योगदान एमएसएमई सेक्टर का है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, अभी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, औद्योगिक सेक्टर में करीब 90 फीसदी रोजगार एमएसएमई सेक्टर से ही पैदा होता है। जिस तरीके से इस लघु उद्योग पर जीएसटी का बुरा असर देखने को मिला है, उससे देश में बेरोजगारी बढ़ रही है।

चीन से बढ़े आयात ने दिया एमएसएमई को झटका

पी. चिदंबरम के मुताबिक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र या गुजरात, हर एक राज्य में एमएसएमई बंद पड़े हुए हैं। इसके दो कारण हैं। पहला तो जीएसटी है और दूसरा कारण चीन से बढ़ा आयात है। दोनों ने एक साथ एमएसएमई का बिल्कुल सत्यानाश कर दिया है। ये जीएसटी का पहला नकारात्मक असर है, जो पिछले पांच साल में देखने को मिला है। आठ नवंबर, 2016 को देश की अर्थव्यवस्था पर पहला धक्का नोटबंदी की घोषणा से पड़ा था। एक जुलाई 2017 को जल्दबाजी में गलत तरीके से जीएसटी लागू किया गया, जो दूसरा धक्का साबित हुआ। जयराम रमेश ने कहा, यूपीए के कार्यकाल में जीएसटी की परिकल्पना की गई थी। जब पी. चिदंबरम ने 2004 में बजट पेश किया, तो उन्होंने पहली घोषणा यही की थी कि वे जीएसटी लाएंगे। तब उसका विरोध गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था। उस जीएसटी और आज की जीएसटी में जमीन-आसमान का फर्क है। चिदंबरम ने कहा था कि जब हम जीएसटी लागू करेंगे तो उसकी एक ही दर होगी। वह कम से कम होगी। आज उसकी छह दरें हैं। पिछले पांच सालों में हर दो दिन में कोई न कोई नया ऑर्डर, संशोधन या कोई नया सर्कुलर निकाला जा रहा है। जीएसटी में कोई स्थिरता नहीं है। स्थिरता के बिना ये जीएसटी, हमारे देश में सफल नहीं हो सकती।

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच में विश्वास की कमी

बतौर जयराम रमेश, जीएसटी की परिभाषा, जीएसटी का मूल सिद्धांत है। इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच में विश्वास की कमी रही है। केंद्र सरकार ने कुछ अपने अधिकार छोड़े, राज्य सरकारों ने कुछ अपने अधिकार छोड़े और तब कहीं जाकर जीएसटी बना था। पार्लियामेंट में कानून पारित हुए। पिछले पांच सालों में जिस तरीके से जीएसटी काउंसिल ने काम किया है, ये बिल्कुल प्रधानमंत्री कार्यालय का एक अंग बन गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय जो कहता है, वही जीएसटी काउंसिल में होता है। आम सहमति की बात, जिसे बार-बार वित्त मंत्री कहती हैं, वह हकीकत में आम सहमति नहीं है। जीएसटी काउंसिल के बाहर बुलडोजर राज और जीएसटी काउंसिल के अंदर भी बुलडोजर राज है। ये तो बुल्डोजर ही बुल्डोजर है। कोई आम सहमति नहीं है। राज्यों की तो कहीं कुछ सुनवाई ही नहीं होती। राज्यों से जो मांगें आती हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। चार दिन पहले सभी राज्यों ने यह सोचा था कि जीएसटी में जो मुआवजा मिलता है, उसे चार साल में बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जीएसटी कंपनसेशन बढ़ा नहीं है। सभी राज्यों की वित्तीय स्थिति अभी नाजुक है, खतरे में है। राज्य सरकारों के स्वास्थ्य क्षेत्र, शिक्षा व ग्रामीण विकास पर होने वाले खर्च में इसका नकारात्मक असर देखने को मिलेगा।

इन तीन वर्गों को हुआ है जीएसटी का फायदा

जीएसटी में एक फ्लेक्सिबिलिटी होनी चाहिए। यह फ्लेक्सिबिलिटी, महामारी जैसी आपदा में काम आती है। आज सारे मामलों में राज्य, केंद्र सरकार पर निर्भर हैं। कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की बात की गई थी, लेकिन जब जीएसटी लागू हुआ, तो वह सिद्धांत कहीं नजर नहीं आया। जीएसटी के कार्यान्वयन में भी यह भावना देखने को नहीं मिली। पहले गुजरात के मुख्यमंत्री जीएसटी के खिलाफ थे। बाद में जब वे प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने यू-टर्न ले लिया। उनके लिए जीएसटी एक जादू की छड़ी बन गई। 2017 में उन्होंने ये तुगलकी फरमान जारी कर दिया। नोटबंदी पहला तुगलकी फरमान था, जीएसटी दूसरा फरमान था। जीएसटी का जो मूल डिजाइन था, वह गलत था। उसी की वजह से आज एमएसएमई सेक्टर बंद पड़ा है। आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। राज्यों में केन्द्र सरकार के प्रति विश्वास लगातार घट रहा है। अब जीएसटी काउंसिल एक कठपुतली बन गई है। सभी अहम निर्णय जीएसटी काउंसिल में लिए जाते हैं। एमएसएमई पर जो जीएसटी लागू होता है, उसकी पूरी समीक्षा होने की जरुरत है। जिस तरीके से लघु उद्योगों, सूक्ष्म उद्योंगों व मध्यम उद्योगों पर जिस तरह से जीएसटी लागू हो रही है, वह सिर्फ दर तक सीमित नहीं है। इससे तीन जगह फायदा पहुंचा है। एक बड़ी-बड़ी कंपनी वालों को, दूसरा चार्टेड अकाउंटेंट और तीसरे नंबर पर वकील आते हैं। केवल वकीलों, सीए और बड़े-बड़े उद्योगों को ही जीएसटी का फायदा हुआ है।

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