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चिदंबरम को राहत दिलाने के लिए उनके वकीलों ने की प्री-अरेस्ट कानून में बदलाव की मांग

Wed, 21 Aug 2019 08:38 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
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p chidambaram - फोटो : ANI
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पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिदंबरम को जब हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली, तो वे सुप्रीम कोर्ट में फौरी राहत लेने पहुंच गए। बुधवार को उन्हें यहां भी कोई राहत नहीं मिली। मामले की सुनवाई अब शुक्रवार को होगी। खास बात है कि चिदंबरम के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे उनके वकील दो कदम आगे चल रहे हैं। मंगलवार को हाईकोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया केस में चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

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अदालत के इस फैसले में पी.चिदंबरम के वकीलों द्वारा दी गई दलील का जिक्र किया गया था। उनके वकील, जिनमें कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा, दायन कृष्णा, मोहित माथुर, पीके दुबे, अर्शदीप सिंह, आदित्य पुजारी, अमित भंडारी, अक्षत गुप्ता, अविश्कार सिंघवी, हरप्रीत कलसी, आयुष अग्रवाल, इशिता गर्ग और संजीव शेषाद्री ने अपने याचिकाकर्ता को राहत दिलाने के लिए संसद से प्री-अरेस्ट कानून में बदलाव करने की मांग कर डाली।

प्री-अरेस्ट कानून में हो बदलाव

हाईकोर्ट के फैसले में साफतौर पर लिखा है कि याचिकाकर्ता पी.चिदंबरम के वकीलों ने अपनी दलील में कहा, आज कानून बनाने वाले ही कानून तोड़ रहे हैं। वो भी दंडमुक्ति की भावना के साथ। अब समय आ गया है कि आर्थिक अपराध के मामले में प्री-अरेस्ट कानून को बदल दिया जाए। संसद को इस कानून में ऐसे बदलाव करने चाहिए कि जिससे यह प्री-अरेस्ट कानून, खासतौर पर आर्थिक अपराध के हाई प्रोफाइल मामलों में निष्प्रभावी हो जाए। चिदंबरम का मामला भी ऐसा ही है। आर्थिक अपराधों के मामले में कार्रवाई के लिए एक अदालती प्रक्रिया तय की गई है।

आईएनएक्स मीडिया केस में सीधे तौर पर चिदंबरम का नाम नहीं

इस कानून की बारीकियों को धुंए में नहीं उड़ा सकते। जांच एजेंसी पहले मामला दर्ज करने की इजाजत मांगती है और फिर चार्जशीट पेश कर उसे घुमाती रहती है। ऐसे कई मामले, जिनमें जरुरत न होते हुए भी किसी आरोपी को किंग पिन बना दिया जाता है। वकीलों की दलील थी कि चिदंबरम के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। आईएनएक्स मीडिया केस में सीधे तौर पर चिदंबरम का नाम नहीं है, लेकिन इसके बाद भी उनकी प्री-अरेस्ट बेल निरस्त कर दी जाती है। वकीलों ने अपनी दलील में यह बात कई बार दोहराई कि उनके याचिकाकर्ता पी. चिदंबरम राज्यसभा सदस्य हैं। वे इस मामले से भाग नहीं रहे हैं। उन्होंने सदैव जांच एजेंसियों का सहयोग किया है। जब भी पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया गया, वे जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंचे हैं।

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