राजीव गांधी के करीबियों में थे शुमार, संभाली थी वाणिज्य मंत्रालय
1984 में चिदंबरम तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी बने और उनकी सरकार में वाणिज्य राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। प्रधानमंत्री नरसिंह राव की सरकार में भी वह राज्यमंत्री रहे। तब उनके पास वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। हालांकि, पार्टी के कुछ फैसलों से मतभेद के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़कर 1996 में नया राजनीतिक दल बनाया। एक साल बाद ही उन्हें 13 दलों के गठबंधन वाली संयुक्त मोर्चा सरकार में वित्त मंत्री के नाते 'ड्रीम बजट' पेश करने के लिए जाना गया और उन्होंने भारत के कर आधार को व्यापक करने में भूमिका निभाई। उनका यह बजट ऐसे समय में पेश किया गया जब गठबंधन सरकारों के दौर में आर्थिक सुधारों को गरीब-विरोधी के रूप में देखा जाता था। लेकिन चिदंबरम की तारीफ हुई।
यूपीए सरकार में भी संभाला अहम मंत्रालय
बाद में चिदंबरम कांग्रेस में लौट आए और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बनी सरकार में वित्त मंत्री की कमान संभाली। वह 2004 से 2008 तक वित्त मंत्री रहे और दिसंबर 2008 से जुलाई 2012 तक गृह मंत्री रहे। बाद में यूपीए-2 के शेष कार्यकाल में वह वित्त मंत्री रहे। कुछ साल पहले कांग्रेस में कुछ नेता उन्हें केंद्र में गठबंधन की सरकार बनने की स्थिति में प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार भी मान रहे थे।
आर्थिक सुधारों के क्रियान्वयन का श्रेय चिदंबरम को
पिछले महीने अदालत में सीबीआई की ओर से दलील रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चिदंबरम 'अत्यंत विद्वान' हैं और उनमें अपने खिलाफ जांच में सहयोग नहीं करने की पूरी क्षमता है। चिदंबरम को उन श्रृंखलाबद्ध आर्थिक सुधारों के क्रियान्वयन का श्रेय दिया जाता है जिनका उद्देश्य विकास में आ रही मंदी को थामना, बढ़ते हुए राजकोषीय घाटे पर लगाम लगाना और एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करना था।
भ्रष्टाचार के मामलों में चिदंबरम और उनके परिवार पर कसा शिकंजा
वह 2014 में संप्रग-2 सरकार रहने तक केंद्रीय मंत्री रहे और उसी साल हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने तमिलनाडु में अपनी परंपरागत लोकसभा सीट शिवगंगा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। इससे पहले वह सात बार इस सीट पर जीत हासिल कर चुके थे। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद जांच एजेंसियों ने आईएनएक्स मीडिया, एयरसैल मैक्सिस और संप्रग-2 में चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए एयर इंडिया द्वारा विमानों की खरीद समेत भ्रष्टाचार के मामलों में उन पर तथा उनके परिवार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। वर्तमान में राज्यसभा सदस्य चिदंबरम जब वित्त मंत्री थे, तब उनके लिए गये अनेक फैसलों पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहे हैं।