रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में भारत के पांच फीसदी लोगों का देश की कुल संपत्ति में से 62 फीसदी हिस्से पर कब्जा था। वहीं, भारत की निचली 50 फीसदी आबादी का देश की महज तीन फीसदी संपत्ति पर कब्जा रहा। ऑक्सफैम की यह रिपोर्ट- 'सर्वाइवल ऑफ द रिचेस्ट: द इंडिया स्टोरी' के मुताबिक, भारत में जहां 2020 में अरबपतियों की संख्या 102 थी, वहीं 2022 में यह आंकड़ा 166 पर पहुंच गया है। यह रिपोर्ट सोमवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में पेश की जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति 660 अरब डॉलर (करीब 54 लाख 12 हजार करोड़ रुपये) के पार जा चुकी है। बता दें कि इससे भारत का पूरा बजट 18 महीने तक चलाया जा सकता है। विश्लेषण के मुताबिक, अगर भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति पर सिर्फ दो फीसदी टैक्स ही लगाया जाए तो इससे अगले तीन साल तक कुपोषण का शिकार बच्चों के लिए सभी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
पिछले 10 सालों में भारत में पैदा हुई संपत्ति के गैर-बराबर बंटवारे के मुद्दे को भी रिपोर्ट में उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि 2012 से 2021 के बीच भारत में जितनी भी संपत्ति अस्तित्व में आई, उसका 40% देश के सबसे अमीर एक फीसदी के हाथ में गया। वहीं, 50 फीसदी जनता के हाथ में महज तीन फीसदी संपत्ति ही आई है।
ऑक्सफैम की नवीनतम रिपोर्ट जारी होने के बाद कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि केंद्र सरकार केवल मुट्ठी भर लोगों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, सबसे अमीर 21 भारतीयों के पास देश के 70 करोड़ लोगों से ज्यादा संपत्ति है।
जयराम रमेश ने कहा, केंद्र सरकार ऑक्सफैम के सुझाव, अमीरों पर संपत्ति कर लगाने के सुझाव को निश्चित रूप से अनसुना कर देगी। जयराम रमेश ने ट्विटर पर कहा, सबसे अमीर 21 भारतीय अरबपतियों के पास 70 करोड़ भारतीयों की तुलना में अधिक संपत्ति है। भारत के शीर्ष एक प्रतिशत के पास अब कुल संपत्ति का 40.5 प्रतिशत हिस्सा है। कोरोना के बाद से भारत के अरबपतियों की संपत्ति में 121 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह सरकार की वजह से है, जो मुट्ठी भर लोगों के लिए काम करती है।