पंचायती राज सचिव ने कहा कि सबसे महत्वर्ण कदम स्वामित्व योजना है। इसके जरिए गांव, गांव वासियों, जिले के राजस्व विभाग और प्रदेश सरकार को जमीन, जायदाद से जुड़ा एक सटीक आंकड़ा दिया जा सकेगा। इससे गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी तथा सार्वजनिक भूमि आदि को लोगों के अतिक्रमण, तरह-तरह के अनियमित कार्यों से बचाया जा सकेगा। पंचायतों की जमीनों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। ऐसा ड्रोन से हवाई मैपिंग के जरिए महज छह हजार रुपये प्रति गांव खर्च करके किया जा सकेगा। इसकी प्रामाणिकता भी सर्वे ऑफ इंडिया की रहेगी।
पंचायती राज सचिव के अनुसार इसके पहले चरण में हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उ.प्र., उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश, पंजाब और राज्य के सीमावर्ती जिलों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके अंतर्गत करीब एक लाख गांव आएंगे। इसके लिए म.प्र., हरियाणा, राजस्थान, पंजाब में 210 सीओआरएस नेटवर्क स्थापित किए जाने हैं। 95 के करीब सीओआरएस नेटवर्क नमामि गंगे परियोजना के तहत स्थापित हैं और 2022 तक कुल 567 सीओआरएस नेटवर्क स्थापित करने की योजना है। सुनील कुमार कहते हैं कि यह नेटवर्क स्थापित होने के बाद यथा शीघ्र पूरे देश के जमीन, जायदाद, गांव आदि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
पंचायती राज सचिव ने कहा कि उनकी लोगों से अपील है कि जब उनके क्षेत्र में ड्रोन से सर्वे हो रहा हो तो उन्हें अपने गांव में पहुंचना चाहिए। वहां अपनी जमीन पर मालिकाना हक पाने, आबादी पर अपना हक जताने में सहयोग देना चाहिए। यह पूरी पैमाइश जीपीएस के सहयोग से ड्रोन के माध्यम से सर्वे द्वारा की जाएगी। इसमें राज्य सरकार की सहमति होगी और राज्य सरकार का राजस्व विभाग सहयोगी भूमिका में रहेगा। ऐसा पहली बार होगा जब गांवों में आबादी आदि की प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी। लोगों का उस पर स्वामित्व तय हो सकेगा।