फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीएसएफ में सेहत को लेकर सख्ती: अब फिटनेस से नहीं होगा समझौता

Fri, 24 Jul 2020 10:17 PM IST
Rohit Ojha जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 

सार

मई में बीएसएफ के डीजी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी महानिदेशक देसवाल ने राजस्थान सीमा के साथ साथ 50 किलोमीटर की पैदल यात्रा की थी। उस वक्त अनेक अधिकारी डीजी के साथ पैदल यात्रा में भाग नहीं ले सके। 
विज्ञापन
बीएसएफ के जवान - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात 'सीमा सुरक्षा बल' (बीएसएफ) में इन दिनों 'तोंद' को लेकर जंग छिड़ी है। बल के डीजी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी महानिदेशक एसएस देसवाल सभी जवानों और अफसरों की फिटनेस को लेकर काफी सख्त नजर आ रहे हैं। 

विज्ञापन


फिटनेस को लेकर बीएसएफ में की जा रही ये सख्ती देश की सीमाओं को लेकर वर्तमान हालात को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण भी हो जाती है। हालांकि फिटनेस को लेकर ये सख्ती कुछ कर्मियों के लिए चिंता का सबब भी बन सकती है। खास तौर पर उनके लिए जिन्होंने अपनी सेहत और फिटनेस को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई है। पर कुल मिलाकर इस तरह की फिटनेस सभी सुरक्षा बलों और यहां तक की पुलिस के लिए भी हमेशा से चिंता का विषय रही है। 

इसी मुहिम के तहत 24 डीआईजी और कमांडेंट, जिन्हें वजन कम करने के लिए आठ जून से 30 जून तक बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में भेजा गया था। इस अभ्यास से औसतन पांच किलो वजन कम हुआ है। ये संतोषजनक तो है पर आगे की मुश्किल राह की ओर भी इशारा करता है।
विज्ञापन


दरअसल मई में देसवाल ने राजस्थान सीमा के साथ साथ 50 किलोमीटर की पैदल यात्रा की थी। उस वक्त अनेक अधिकारी डीजी के साथ पैदल यात्रा में भाग नहीं ले सके। डीजी देसवाल को यह बात अच्छी नहीं लगी। उन्होंने सेक्टर जैसलमेर (दक्षिण) से दिल्ली लौटते ही आदेश जारी कर दिया कि जिनकी तोंद निकली है, वे टेकनपुर अकादमी में तीन सप्ताह की ट्रेनिंग पर पहुंचे। 

मुश्किल लक्ष्य और बीएसएफ की चिंता

फिजिकल फिटनेस के लिए बीएसएफ में अपने नियम हैं। यदि कोई मेडिकल रूप से अनफिट है तो सेवा समाप्त हो सकती है। अफसरों का तर्क है कि बीएसएफ को अब उन युवा अफसरों की सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है जो बीओपी पर तैनात हैं। अधिक उम्र के अफसर इस पूरी मुहिम को लेकर कुछ चिंतित अवश्य दिखाई दे रहे हैं। पर कुल मिलाकर संदेश ये भी है कि अब बीएसएफ में फिटनेस को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 

देश की सरहदों पर डटे सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए ये फिटनेस अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। देश की सीमाओं में सेंध लगाने वाले आतंकी हों या तस्कर, सभी से निपटने के लिए बीएसएफ के जवानों को हमेशा चुस्त और मुस्तैद बने रहना होता है।

फिटनेस की ये पूरी मुहिम आसान भी नहीं है। इस पर बल को खर्च भी अच्छा खासा करना होगा। पर इससे अगर लक्ष्य हासिल हो जाता है तो निश्चित ही ये बड़ी उपलब्धि होगी।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें