भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात 'सीमा सुरक्षा बल' (बीएसएफ) में इन दिनों 'तोंद' को लेकर जंग छिड़ी है। बल के डीजी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी महानिदेशक एसएस देसवाल सभी जवानों और अफसरों की फिटनेस को लेकर काफी सख्त नजर आ रहे हैं।
फिजिकल फिटनेस के लिए बीएसएफ में अपने नियम हैं। यदि कोई मेडिकल रूप से अनफिट है तो सेवा समाप्त हो सकती है। अफसरों का तर्क है कि बीएसएफ को अब उन युवा अफसरों की सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है जो बीओपी पर तैनात हैं। अधिक उम्र के अफसर इस पूरी मुहिम को लेकर कुछ चिंतित अवश्य दिखाई दे रहे हैं। पर कुल मिलाकर संदेश ये भी है कि अब बीएसएफ में फिटनेस को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
देश की सरहदों पर डटे सीमा सुरक्षा बल के जवानों के लिए ये फिटनेस अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। देश की सीमाओं में सेंध लगाने वाले आतंकी हों या तस्कर, सभी से निपटने के लिए बीएसएफ के जवानों को हमेशा चुस्त और मुस्तैद बने रहना होता है।
फिटनेस की ये पूरी मुहिम आसान भी नहीं है। इस पर बल को खर्च भी अच्छा खासा करना होगा। पर इससे अगर लक्ष्य हासिल हो जाता है तो निश्चित ही ये बड़ी उपलब्धि होगी।