भारत में सड़क सुरक्षा कानून कड़े होने के बावजूद वाहन चालकों की तेज रफ्तार की प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही है। अब तो लड़कियां भी इस मामले में लड़कों से मुकाबला कर रही हैं। इसके अलावा हाईवे पर रील बनाने के लिए स्टंटबाजी एक नई समस्या बनकर उभर रही है।
परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) तथा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की अधिकृत रिपोर्टों के अनुसार पिछले 5 वर्षों के दौरान देशभर में ट्रैफिक नियम उल्लंघन पर कुल 12,000 करोड़ रुपए से अधिक जुर्माना वसूला गया, जिसमें हाई स्पीड यानी ओवर-स्पीड चालानों से ही लगभग 6,000 से 6,500 करोड़ रुपए की वसूली हुई।
विशेषज्ञों का विश्लेषण बताता है कि यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा के मजबूत होने का नहीं, बल्कि रफ्तार केंद्रित ड्राइविंग व्यवहार के खतरनाक रूप से बढ़ने का संकेत है। स्थिति यह है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर 5 वर्षों में 6 गुना वृद्धि हुई है। परिवहन मंत्रालय के ई-चलान डैशबोर्ड और एनसीआरबी डेटा दिखाते हैं कि 2020 में जहां कुल 1,950 करोड़ का चालान हुआ था, वहीं 2024 में यह बढ़कर लगभग 12,000 करोड़ पर पहुंच गया। यानी 5 वर्षों में कुल ट्रैफिक चालानों में लगभग 6 गुना उछाल आया। इसमें सबसे अधिक वृद्धि हाई स्पीड उल्लंघनों में दर्ज की गई, जहां 2020 के लगभग 850 करोड़ रुपए की तुलना में 2024 में वसूली 6,000 करोड़ से ऊपर पहुंची यानी लगभग 7 गुना वृद्धि।
नियम तोड़ने में यूपी सबसे आगे
देश में हाई स्पीड चालानों से कुल वसूली का लगभग 60% हिस्सा केवल 5 राज्यों से आया। आंकड़ों के अनुसार इनमें 18% चालान के साथ उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। इसके बाद महाराष्ट्र लगभग 14, दिल्ली 11%, तमिलनाडु लगभग 9% और हरियाणा 8% है। इन राज्यों में हाईवे विस्तार, बड़े इंजन क्षमता वाले वाहनों की बिक्री और एक्सप्रेसवे ड्राइविंग कल्चर ने ओवर-स्पीड मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। पंजाब में भी हाई स्पीड ड्राइविंग, रेस ड्राइविंग और रील-प्रेरित स्टंटबाजी के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
तेजी से बढ़ रहे हाई स्पीड चालान
राजस्व बढ़ना सफलता नहीं, सड़क सुरक्षा तभी सफल जब चालान घटें। इंडियन रोड सेफ्टी फाउंडेशन के सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू कहते हैं, देश में हाई स्पीड चालानों से राजस्व बढ़ना चिंताजनक संकेत है। सड़क सुरक्षा की सफलता तब होगी जब चालान कम होने लगें, न कि जुर्माना संग्रह बढ़े। केरल, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में औसतन पिछले पांच वर्षों के दौरान तेज रफ्तार और स्टंट संबंधित उल्लंघनों में 18% से 32% तक की कमी दर्ज हुई, जिसका श्रेय कड़े प्रवर्तन, कैमरा-आधारित निगरानी, रात के समय स्पेशल पेट्रोलिंग, युवा राइडर्स पर केंद्रित अभियान और सोशल मीडिया स्टंट वीडियो के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को दिया गया।