1991-2015 के बीच 29 करोड़ हेक्टेयर स्थानीय जंगलों को खत्म कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वन्यजीवों, पक्षियों और पेड़-पौधों के अस्तित्व पर तेजी से खतरा मंडराने लगा है। जैव विविधता के विशेषज्ञ एडवर्ड ओ विल्सन ने कई साल पहले कहा था कि धरती पर इंसान के आने से पहले मौजूद प्रजातियां अब 100 गुना तेजी से विलुप्त हो रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन का कहना है कि ताजा हालात की बात करें तो दस लाख पौधे और जानवरों की प्रजातियों पर विलु्प्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
जैव विविधता रहेगी तो ही बचेगा इंसान का भविष्य
वैज्ञानिकों के अनुसार मानव के अच्छे स्वास्थ्य और संतुलित पर्यावरण के लिए जैव विविधता का होना बेहद जरूरी है। कुदरत के साथ खिलवाड़ होने पर वह कोरोना जैसा कहर बरपाती है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती इंसानी आबादी के कारण जानवरों की आवाज का नष्ट होना, वन्यजीवों की खरीद-फरोख्त प्रदूषण और जलवायु संकट खतरनाक हुआ है। ऐसे में इन समस्याओं से तत्काल निपटा जाना चाहिए।
6.6 करोड़ साल बाद छठे सामूहिक विलुप्तकरण की ओर
हाल ही में प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशन एकेडमी ऑफ साइंसेस के एक अध्ययन में सामने आया है कि अगले 20 वर्षों में वन्यजीवों की पांच सौ प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। अगर कुदरत के साथ इंसानी खिलवाड़ नहीं होता तो यह प्रजातियां अगले दस हजार साल तक जीवित रहती। वहीं 515 प्रजातियों की आबादी एक हजार से भी कम मिली है।
आज हालात यह है कि धरती पर कई जानवरों के छठे सामूहिक विलुप्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि अतीत में 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोर विलुप्त हुए थे।