मौसम में होते अप्रत्याशित बदलाव लोगों की मौत का प्रमुख कारण बनने लगे हैं। पिछले साल देश भर में इस वजह से 16 सौ से अधिक लोगों की जानें गई थीं। भारतीय मौसम विभाग ने इस संबंध में आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार मौसम में बदलाव की वजह से होने वाली मौतों में सर्वाधिक 40 फीसदी लोग लू की वजह से जान गंवाते हैं। इसके बाद बाढ़ और बिजली के गिरने से सबसे अधिक लोग मरते हैं।
मौसम विभाग ने बताया कि पिछला साल विश्व के साथ ही भारत के लिए भी अब तक का सबसे गर्म साल रहा है। राजस्थान के फलौदी में देश का अब तक का सबसे अधिक तापमान 51 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। वर्ष 1901 से मौसम संबंधित आंकड़े रिकॉर्ड कर रहे विभाग ने बताया कि पिछले साल का जनवरी और फरवरी सर्दियों का सबसे गर्म महीना रहा था।
बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र में मौसम संबंधी कारणों से कुल 552 लोगों की मौतें हुई थीं। लू के कारण तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 400 से अध्धिक लोगों ने जानें गवाई थीं। गुजरात और महाराष्ट्र में लू के कारण क्रमश: 87 और 43 लोग मरे थे।
आंकड़ों के मुताबिक शीतलहरी से देश भर में 53 लोग मरे थे। बिजली गिरने के कारण कुल 415 लोग मरे थे और इससे सर्वाधिक प्रभावित बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे पूर्वी राज्य हुए थे।