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Delhi: 'लैटिन अमेरिकी-कैरिबियाई देशों से रिश्ते हुए मजबूत, बढ़ेगा व्यापार', भारत-LAC कॉन्क्लेव में बोले जयशंकर

Thu, 03 Aug 2023 11:28 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्री नौवें सीआईआई भारत-एलएसी कॉन्क्लेव ‘साझा एवं सतत विकास के लिए आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वास्तव में विदेशों के साथ भारत के संबंधों को और बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : social media
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, लैटिन अमेरिकी व कैरिबियाई देशों (एलएसी) के साथ भारत के रिश्ते मजबूत हुए हैं। कारोबार 2027 तक बढ़कर 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की तरफ से आयोजित 9वें भारत-एलएसी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना, संसाधनों की भागीदारी, विकास के अनुभव साझा करना और वैश्विक चुनौतियों को हल करना एलएसी और भारत के बीच कारोबार बढ़ाने के चार प्रमुख आधार हैं।

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आपूर्ति शृंखला में विविधता पर जयशंकर ने कहा, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता सुरक्षा के लिए लचीली और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला बनाने में सहयोग से भारत-एलएसी संबंधों के लिए कई रास्ते खुलेंगे। वहीं, संसाधनों में भागीदारी को लेकर उन्होंने कहा, भारत फिलहाल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो जल्द ही तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ बढ़ रहा है। भारत में इस दौरान तेल, गैस, रणनीतिक खनिज, भोजन की मांग बढ़ेगी, जिसकी आपूर्ति एलएसी देशों की तरफ से की जा सकती है। वहीं, भारतीय उत्पाद और सेवाएं एलएसी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं।

अपने अनुभव साझा करने को तैयार
विकास के अनुभव साझा करने को लेकर जयशंकर ने कहा, ग्लोबल साउथ के देशों को अन्य क्षेत्रों के अलावा डिजिटल बुनियादी ढांचे और डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य समाधान और बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ अधिक गहराई से जुड़ने की जरूरत है। भारत ने अपने लिए इन क्षेत्रों में राह बनाई है, जिसका अनुभव भारत एलएसी के साथ साझा करने को तैयार है।
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वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने का आह्वान
जयशंकर ने भारत और एलएसी देशों और समग्र रूप से ग्लोबल साउथ के रूप में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक वित्तीय और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार व वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने का आह्वान करते हुए कहा, हमारे आपसी संबंधों की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि लोगों से लोगों के संबंध मजबूत हों और लोगों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आए। आने वाले समय को ग्लोबल वर्कप्लेस का दौर बताते हुए जयशंकर ने कहा, दोनों क्षेत्रों के बीच लोगों की आवाजाही पर समझौते की जरूरत है, जिससे कुशल लोग एक-दूसरे के क्षेत्रों में आसानी से आएं-जाएं।

जन औषधि को अपनाएं एलएसी
नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवा समाधानों की बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, जन औषधि केंद्र भारत की ऐसी कल्याणकारी योजना है, जिसे एलएसी क्षेत्र में अपनाए जाने की जरूरत है। इससे गरीब व निम्न आय वर्ग के लोगों को किफायती दर पर जेनरिक दवाएं मिलती हैं।

भारत की मदद से 35 परियोजनाएं जारी
विकास के लिए भागीदारी के मुद्दे पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा, भारत की मदद से एलएसी में 35 परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनमें से 21 तो पूरी हो चुकीं हैं। ये परियोजनाएं भारत की तरफ से मुहैया कराई गई वित्तीय सुविधा से संचालित की जा रहीं हैं।

11 देशों के 17 प्रतिनिधि हुए शामिल
सीआईआई के अध्यक्ष आर दिनेश ने बताया कि कॉन्क्लेव में वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज सहित 11 लैटिन अमेरिकी देशों के वरिष्ठ मंत्री व प्रतिनिध शामिल हुए। इस दौरान सतत विकास, लचीली अर्थव्यवस्था, तकनीक हस्तांतरण, शोध व विकास, खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा जैसे मसलों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इस दौरान फार्मा, कृषि व कई अन्य उद्योगों के क्षेत्र में द्विपक्षीय समझौते भी हुए। दिनेश ने कहा, दोनों क्षेत्रों के बीच कारोबार को बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौते की जरूरत है।

भारत से मजबूत करने हैं रिश्ते : वेनेजुएला
कॉनक्लेव में शामिल होने पहुंचीं वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा, भारत आकर बहुत खुशी हो रही है। हम भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को गहरा करना चाहते हैं। भारत के साथ पहले भी हमारे गहरे संबंध रहे हैं। भारत हमसे ईंधन खरीदता है और हम भारत से दवाएं व रसायन। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के इस संदेश के साथ यहां आई हैं कि भारत एक वैश्विक शक्ति है, जिसके साथ वेनेजुएला करीबी संबंध चाहता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, लैटिन अमेरिकी व कैरिबियाई देशों के भारत के साथ गहरे संबंध दोनों देशों के हित में हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों, ऊर्जा, स्वास्थ्य, फार्मा, आयुर्वेद, योग, विज्ञान व तकनीक पर विस्तृत चर्चा हुई।

 

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