इसके साथ ही कहा गया है कि ट्रस्टियों ने ओशो से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट) भी अपने पास रख लिए हैं। वहीं, सरकारी वकील अरुणा पई ने खंडपीठ को बताया कि इस संबंध में पुलिस ने विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखा है। पुणे की स्थानीय अदालत ने भी स्पेन की कोर्ट को एक आग्रह पत्र भेजा है जहां ओशो की एक वसीयत होने का दावा किया गया है।
बांबे हाईकोर्ट ने पुणे पुलिस को दिया निर्देश
पई ने कहा कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इस दौरान उन्होंने जांच को लेकर एक प्रगति रिपोर्ट भी खंडपीठ के सामने पेश की। ठक्कर ने इसको लेकर पुणे के कोरेगांव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस की ओर से जांच की दिशा में कोई ठोस कदम न उठाए जाने के चलते बाद में इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई थी।