महाराष्ट्र के पुणे स्थित ओशो इंटरनेशन मेडिटेशन रिसॉर्ट की तीन एक एकड़ जमीन बेचने का मामला गरमाता ही जा रहा है। ओशो के बहन-बहनोई, कुछ अनुयायी और पूर्व ट्रस्टी ने प्रेम का मंदिर बासो को बेचे जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। साथ ही यहां अन्य अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की माग की है। अब ये पूरा मामला मुंबई चैरिटेबल कमिश्नर के यहां पहुंच गया है, जिसकी आज सुनवाई होनी है।
इंटरनेशनल मेडिटेशन रिसॉर्ट जिसे ओशो के प्रेम का मंदिर बाशो कहा जाता है। ओशो के तीन अनुयायी और एक पूर्व ट्रस्टी के इसकी तीन एकड़ जमीन बेचने का प्रस्ताव दिया। इसके दो प्लॉट की कीमत 107 करोड़ रुपये लगाई गई है। ओशो के अनुयायी योगेश ठक्कर ने आरोप लगाया था कि मौजूदा ट्रस्टी ने मुंबई धर्मादाय आयुक्त को एप्लिकेशन दी है कि कोरोना काल में ओशो कम्यून में साढ़े तीन करोड़ का खर्चा हुआ है। इसके साथ ही अंतराष्ट्रीय सफर पर पाबंदी होने के कारण यहां विदेशों से आने वाले लाखों अनुयायी भी नहीं आ सकते हैं, इसके लिए आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए एकमात्र उपाय जमीन बेचना ही है। इसके बाद से यह मुद्दा गरमाता जा रहा है।
अनुयायियों ने कहा, तीन करोड़ दो दान से ही आ जाएंगे
योगेश ठक्कर और नौ अन्य अनुयायियों का कहना है कि तीन करोड़ रुपये बहुत बड़ी रकम नहीं है। अगर चाहें तो दुनिया भर में ओशो के अनुयायी ये रकम महज दान देकर एकत्र कर सकते हैं। ओशो के अनुयायियों के एक समूह ओशो फ्रेंड्स फाउंडेशन ने इस बिक्री पर आपत्ति जाहिर की है और समूह ने चैरिटी कमिश्नर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
मामला मुंबई चैरिटेबल कमिश्नर के यहां पहुंचा
ओशो कम्यून के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि जमीन बेचने का निर्णय ट्रस्ट के सभी नियमों का पालन करते हुए किया गया है। अब ये मामला मुंबई चैरिटेबल कमिश्नर के यहां पहुंच गया है।ओशो के अनुयायियों की अर्जी पर मुंबई चैरिटेबल कमिश्नर के यहां आज सुनवाई होनी है।