वैज्ञानिकों का मानना है कि लैब में विकसित मानव अंग (ऑर्गेनॉइड) कोरोना महामारी का उपचार तलाशने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनका दावा है कि वायरल बीमारियाें पर अध्ययन की इस तकनीक से कोरोना की दवा तलाशने के प्रयासों को गति मिलेगी।
कनाडा स्थित ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में लाइफ साइंस संस्थान के निदेशक जोसेफ पेनिंगर के मुताबिक लैब में बने ये कृत्रिम मानव अंग इंसानों के अंगों की ही तरह होते हैं। इन पर दवाओं का परीक्षण कर वैज्ञानिक ये पता लगा सकते हैं कि दवाओं का मानव अंगों पर क्या असर पड़ेगा।
इन अंगों पर टीके का परीक्षण भी किया जा सकता है। इसका सबसे अच्छा पहलू यह है कि परीक्षण के दौर में मरीजों पर कोई विपरीत असर नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इन अंगों को मानव स्टेम सेल से ही बनाया जाता है और यह पूरी तरह वास्तविक मानव अंग की तरह ही बर्ताव करते हैं। फिलहाल के लिए कोरोना की दवा तलाशने में इस्तेमाल के लिए रिक्त कोशिकाओं के ऑर्गेनॉइड सबसे सटीक विकल्प है।