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सरकार को पर्सनल लॉ मसले पर गठित कमेटी की रिपोर्ट पेश करने का आदेश

Mon, 28 Mar 2016 10:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उच्च स्तरीय कमेटी की उस रिपोर्ट को पेश करने के लिए कहा है जिसमें मुस्लिम सहित अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों में विवाह, तलाक, अभिरक्षण अधिकार आदि पर्सनल लॉ के पहुलओं का परीक्षण किया गया था।
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इसके साथ ही ट्रिपल तलाक, बहुविवाह सहित पर्सनल लॉ के कई प्रावधान के कारण प्रताड़ना का शिकार हो रही मुस्लिम महिलाओं के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विस्तृत सुनवाई शुरू कर दी। इस मामले में न केवल सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है बल्कि कई अन्य याचिकाएं भी दाखिल की गई है।

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता को छह हफ्ते में ‘महिला एवं कानून’ पर गठित उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। अब तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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अन्य याचिकाओं पर भी पक्ष रखने को कहा

इसके अलावा पीठ ने शायरा बानो सहित अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं पर केंद्र, राष्ट्रीय महिला आयोग और मुस्लिम संगठनों को छह हफ्ते के भीतर अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को गत वर्ष 16 अक्टूबर को दो सदस्यीय पीठ द्वारा स्वत: संज्ञान याचिका पर छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। सरकार को इस सवाल का जवाब देने के लिए कहा गया कि अगर मुस्लिम महिलाएं लैंगिक भेदभाव का शिकार हो रही है तो क्या इसे मूल अधिकारों का हनन नहीं कहा जाना चाहिए?

मालूम हो कि शायरा बानो ने ट्रिपल तलाक को चुनौती दी है। साथ ही तलाकशुदा पति से शादी करने पर रोक (हालाला) को भी चुनौती दी है। उसकी याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ के इन प्रावधानों को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया गया है।

याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ वकील अमित सिंह चड्ढा और बालाजी श्रीनिवासन के मुताबिक, ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर साउदी अरब, पाकिस्तान, इराक समेत कई इस्लामिक देशों में रोक है लेकिन भारतीय मुस्लिम महिलाएं अब भी यह दुख झेलना पड़ रहा है।
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