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OPS: सरकारी कमियों को मंजूर नहीं 'यूपीएस', बताया पेंशन खत्म करने की साजिश; क्या अब पेंशन' बन गई ‘पेआउट'?

सार

Pension: कर्मचारियों का कहना है कि यूपीएस के गजट में 'पेंशन' की जगह पर 'पेआउट' लिखा है। आरोप है कि कर्मचारियों ने यूपीएस में संशोधन के लिए जो सुझाव दिए थे, उन्हें नहीं माना गया। इन्हीं मांगों को लेकर देश की दस बड़ी ट्रेड यूनियन 20 मई को हड़ताल करेंगी। इस हड़ताल में केंद्र और राज्यों के कर्मचारी संगठन भी शामिल होंगे। 
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Unified Pension Scheme - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का गजट, कर्मचारियों को रास नहीं आया। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार ने उनकी कोई भी मांग, इस गजट में शामिल नहीं की है। सरकारी कमियों को 'यूपीएस' मंजूर नहीं है। उन्होंने इसे पुरानी 'पेंशन' खत्म करने की साजिश बताया है। कर्मचारियों का कहना है कि यूपीएस के गजट में 'पेंशन' की जगह पर 'पेआउट' लिखा है। आरोप है कि कर्मचारियों ने यूपीएस में संशोधन के लिए जो सुझाव दिए थे, उन्हें नहीं माना गया। इन्हीं मांगों को लेकर देश की दस बड़ी ट्रेड यूनियन 20 मई को हड़ताल करेंगी। इस हड़ताल में केंद्र और राज्यों के कर्मचारी संगठन भी शामिल होंगे। 
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जेसीएम के सदस्य और एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार बताते हैं, देखिये सरकार ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया है। कर्मचारियों की मांग पुरानी पेंशन को लेकर है। एआईडीईएफ और दूसरे संगठन, करीब दो दशक से पुरानी पेंशन योजना यानी सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 (अब 2021) के तहत गैर-अंशदायी पेंशन की बहाली के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसके लिए अनेक सेमिनार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और रामलीला मैदान में रैली हुई हैं। 

कर्मचारियों ने शपथ ली थी कि वे एनपीएस के खिलाफ लगातार संघर्ष करेंगे और सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 (अब 2021) के तहत पेंशन के अलावा कोई अन्य पेंशन योजना स्वीकार नहीं करेंगे। एआईडीईएफ ने टीवी. सोमनाथन समिति की बैठकों का बहिष्कार किया, जबकि राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की स्थायी समिति के अन्य सदस्य बैठकों में शामिल हुए। इसके बाद जब प्रधानमंत्री मोदी ने जेसीएम के सदस्यों से मिलना चाहा तो जेसीएम को बैठक का एजेंडा तक नहीं दिया गया। एआईडीईएफ ने पीएम मोदी की बैठक का बहिष्कार किया। 
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इसके बाद एआईडीईएफ के अध्यक्ष और महासचिव ने 23.08.2024 को प्रधानमंत्री को उनके व्यक्तिगत ई-मेल के माध्यम से अपील प्रस्तुत की। उस पर भी कोई अमल नहीं हुआ। अब यह निर्णय लिया गया है कि सरकारी कर्मचारी, यूपीएस को खारिज करते हैं। गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना को प्राप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष को आगे बढ़ाते रहेंगे। पिछले दिनों दिल्ली में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों में की बैठक में विभिन्न मांगों को लेकर 20 मई को हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया है। 

श्रीकुमार के मुताबिक, एकीकृत पेंशन योजना की अधिसूचना में सरकार ने बहुत चालाकी से कहीं भी 'पेंशन' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। पेंशन शब्द को 'आश्वासित भुगतान' शब्दों से बदल दिया गया है। पारिवारिक पेंशन को 'पारिवारिक भुगतान' के रूप में बदल दिया गया है। यह अपने आप में साबित करता है कि यूपीएस पूरी तरह से एक धोखा देने वाली योजना है जिसे पूरी तरह से खारिज किया जाना चाहिए। यूपीएस में यदि किसी कर्मचारी ने आंशिक निकासी की है या उसका अंशदान या नियोक्ता अंशदान कुछ अवधि के लिए नहीं किया गया है, तो व्यक्तिगत कोष कम होगा। 

ऐसे मामलों में पीएफआरडीए बेंचमार्क अंशदान की गणना करेगा, जिसमें यह ध्यान में रखा जाएगा कि यदि कर्मचारी ने निकासी नहीं की होती या यदि उसने या उसके नियोक्ता ने पूरा अंशदान दिया होता, तो कर्मचारी का व्यक्तिगत कोष कितना होता। अनुमानित राशि को बेंचमार्क अंशदान कहा जाता है। यह भी इस योजना में एक और जुआ है। 10 वर्ष से कम सेवा वाले कर्मचारी आश्वासित भुगतान के लिए पात्र नहीं हैं। उनके व्यक्तिगत कोष का क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। 

कर्मचारी के पास पिछले 12 मासिक औसत मूल वेतन का 50% प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 25 वर्ष की अर्हक सेवा होनी चाहिए। यदि सेवा 25 वर्ष से कम है, तो आश्वासित भुगतान आनुपातिक रूप से कम होगा। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामले में, न्यूनतम सेवा अवधि 25 वर्ष है, हालांकि सुनिश्चित भुगतान केवल उसी तिथि से शुरू होगा जिस तिथि को कर्मचारी सेवा में बने रहने पर सेवानिवृत्त होता। यह सबसे खतरनाक है। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी 20 वर्ष की आयु में सेवा में शामिल हुआ और उसने 25 वर्ष बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया, तो उसकी आयु 45 वर्ष होगी और उसे 60 वर्ष की आयु पूरी होने तक प्रतीक्षा करनी होगी, अर्थात 15 वर्ष और इन 15 वर्षों में वह बिना किसी आय के कैसे जीवित रहेगा? यह कर्मचारी के कोष की पूरी लूट है।

'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के महासचिव एसबी यादव का कहना है, यूपीएस में सरकार ने कर्मियों के किसी भी सुझाव को शामिल नहीं किया। सरकार ने दिखाने के लिए सुझाव मांगे थे। कर्मियों की एक ही मांग है कि उनके लिए पुरानी पेंशन लागू हो। सरकारी कर्मचारी, यूपीएस को स्वीकार नहीं करेंगे। जल्द ही कॉन्फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाएगी। उसमें भावी आंदोलन की रणनीति तय होगी। बीस मई की हड़ताल में केंद्र व राज्यों के कई कर्मचारी संगठन भाग ले सकते हैं। 

नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, यूपीएस के गजट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने इसमें कई कमियां बताते हुए संशोधन के लिए सुझाव दिए थे। सरकार ने गजट के विरोध के बावजूद पब्लिक से सुझाव मांगे। उसके बाद उन सुझावों को गजट में शामिल भी नहीं किया। 

ये भी पढ़ें:  Pension: एकीकृत पेंशन योजना की अधिसूचना जारी, केंद्रीय कर्मचारी एक अप्रैल से कर सकेंगे आवेदन

बतौर डॉ. मंजीत, ये केवल प्रक्रियात्मक गजट है। यूपीएस में 'पेआउट' शब्द का इस्तेमाल किया गया है, पेंशन नहीं। गजट का नाम यूपीएस है, लेकिन अंदर 'पेंशन' नहीं, पेआउट दिखता है। यह गजट अपनी ही बातों का विरोधाभासी है। कर्मचारियों की मांग थी कि वीआरएस के लिए 25 साल की अवधि तय करने की बजाए उसे 20 वर्ष किया जाए। दूसरा, वीआरएस के दिन से ही पेंशन मिले। तीसरा, पेंशन का अंशदान, हर हालत में कर्मचारी को वापस मिले। गजट में ये तीनों ही मांगें नदारद हैं। सरकार ऐसा रास्ता बनाने की कोशिश में है कि 'पेंशन' शब्द ही खत्म हो जाए। पेंशन को कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है, लेकिन पेआउट को नहीं। अब पूरे देश में ओपीएस की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन करेंगे।

केंद्र सरकार के कर्मियों के लिए पहली अप्रैल से 'एकीकृत पेंशन योजना' लागू हो जाएगी। जो कर्मचारी एनपीएस से यूपीएस में आएंगे, उन्हें क्या कुछ मिलेगा, ये सब बातें तय कर ली गई हैं। न्यूनतम 10 वर्ष की अर्हक सेवा के पश्चात अधिवर्षिता पर 10 हजार रुपये प्रतिमाह का सुनिश्चित न्यूनतम भुगतान होगा। 

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस बाबत संसद में बताया, यह स्कीम, विद्यमान पेंशन योजनाओं से अलग है, क्योंकि इसमें सुनिश्चित भुगतान के रूप में निर्धारित लाभ के साथ निर्धारित अंशदान की सुविधा शामिल है। 'एकीकृत पेंशन योजना', कर्मचारियों को बाजार संबद्ध प्रतिलाभ की अनिश्चितता से सुरक्षा प्रदान करती है। इतना ही नहीं, यूपीएस, राजकोषीय विवेक साथ-साथ अंतर नागरिक और अंतर-पीढ़ीगत इक्विटी को बनाए रखना सुनिश्चित करती है। 

चौधरी ने बताई यूपीएस की विशेषताएं ... 

—न्यूनतम 25 वर्षों की अर्हक सेवा के लिए अधिवर्षिता से पूर्व के 12 माह के दौरान प्राप्त औसत मूल्य वेतन के 50 प्रतिशत की दर से सुनिश्चित भुगतान। यह भुगतान न्यूनतम 10 वर्ष तक की अपेक्षाकृत कम सेवा अवधि के लिए आनुपातिक होगा। 

—कर्मचारी की मृत्यु के ठीक पहले उसे स्वीकार्य भुगतान के 60 प्रतिशत की दर से उसकी पत्नी/पति को सुनिश्चित पारिवारिक भुगतान 

—न्यूनतम 10 वर्ष की अर्हक सेवा के पश्चात अधिवर्षिता पर 10 हजार रुपये प्रतिमाह का सुनिश्चित न्यूनतम भुगतान 

—सुनिश्चित भुगतान, सुनिश्चित पारिवारिक भुगतान और सुनिश्चित न्यूनतम भुगतान पर मुद्रास्फीति सूचकांक। सेवारत कर्मचारियों के समान महंगाई राहत औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित होगी। 

—प्रत्येक पूर्ण छह माह की सेवा के लिए सेवानिवृत्ति की तिथि पर मासिक परिलब्धियों (वेतन+महंगाई भत्ता) के 1/10वें भाग की दर से ग्रेच्युटी के अतिरिक्त सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त भुगतान, इस भुगतान से सुनिश्चित भुगतान की मात्रा कम नहीं होगी। 
अगर यूपीएस का विकल्प चुनते हैं तो ...  
यूपीएस के अंतर्गत सुनिश्चित भुगतान, केंद्र सरकार के ऐसे कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगा, जो एनपीएस के अंतर्गत कवर होते हैं। वे निम्नानुसार यूपीएस का विकल्प चुनते हैं। 

—किसी कर्मचारी के दस वर्ष की अर्हक सेवा के पश्चात अधिवर्षिता प्राप्त करने के मामले में अधिवर्षिता की तिथि से 

—सरकार द्वारा किसी कर्मचारी की एफआर 56 (ञ) (जो केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1956 के अंतर्गत शास्ति नहीं है) के उपबंधों के अंतर्गत सेवानिवृत्त किए जाने के मामले में इस प्रकार की सेवानिवृत्ति की तिथि से और     

—25 वर्ष की न्यूनतम अर्हक सेवा के पश्चात स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामले में यदि सेवा अवधि अधिवर्षिता तक जारी रहती है तो कर्मचारी जिस तिथि को अधिवर्षिता प्राप्त करता। 
केंद्र सरकार द्वारा 24 जनवरी 2025 को यूपीएस को अधिसूचित किया गया है। पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को यूपीएस के संचालन का दायित्व सौंपा गया है। 
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