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राज्यसभा चुनाव ने दी विपक्षी एकता को नई जमीन, सब कुछ भूलकर एक दूसरे को लगा रहे गले

Mon, 12 Mar 2018 02:05 AM IST
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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सपा, बसपा, कांग्रेस
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लोकसभा चुनाव से पूर्व राजग के खिलाफ प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से एकजुट होने की विपक्ष की कोशिशों को इसी महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव ने एक बेहतर मौका उपलब्ध कराया है। राज्यसभा चुनाव के बहाने विभिन्न राज्यों में विपक्षी दल एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में इसी चुनाव ने सपा-बसपा-कांग्रेस के बीच नजदीकी बढ़ाई तो बिहार, पश्चिम बंगाल सहित कुछ अन्य राज्यों में भी ऐसी ही कोशिशें परवान होती दिखीं। लोकसभा की तीन सीटों गोरखपुर, फूलपुर और अररिया में हुए उपचुनाव केनतीजे आने के बाद विपक्षी एकता की तस्वीर और साफ होगी।
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तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजने में मदद का ऐलान किया है। जबकि राजद सूत्रों का कहना है कि पार्टी बिहार से जदयू के बागी और वरिष्ठ नेता रहे शरद यादव को उच्च सदन भेजने का मन बना चुकी है।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में बसपा उम्मीदवार को समर्थन करने के साथ ही माकपा महासचिव को राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव रखा है। इससे पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बसपा सुप्रीमो मायावती को उच्च सदन भेजने का प्रस्ताव रख चुके थे। जाहिर है कि ये सारी कवायदों को लोकसभा चुनाव से पूर्व विपक्ष को एकजुट करने के पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे नए समीकरण

सपा, बसपा
फिलहाल सबकी निगाहें फूलपुर, गोरखपुर और अररिया लोकसभा उपचुनाव के नतीजे पर है। अगर यूपी के फूलपुर और गोरखपुर में सपा के प्रत्याशी को सफलता हाथ लगी तो राज्य में सपा-बसपा की दोस्ती लोकसभा चुनाव तक बढ़ सकती है। इसी प्रकार अगर बिहार में अररिया सहित कुछ विधानसभा चुनाव के नतीजे राजद के पक्ष में रहे तो राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर तय है। अगर ऐसा हुआ तो फिलहाल राजग में शामिल रालोसपा कोई बड़ा निर्णय ले सकती है।

महाराष्ट्र में भाजपा ने किया बड़ा शिकार

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण राणे को उम्मीदवार बना कर बड़ा शिकार किया है। राज्य में शिवेसना से रिश्तों में जारी खटास के बीच पार्टी ने इस फैसले के जरिए राज्य में अपनी जमीन को और मजबूत बनाने की कवायद शुरू कर दी है। संकेत साफ है कि अगर विधानसभा चुनाव की तरह पार्टी को लोकसभा चुनाव भी शिवसेना के इतर अपने दम पर लड़ना पड़े तो तैयारियों में कोई कमी न रहे। गौरतलब है कि शिवसेना ने अगला लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर चुकी है।
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