सूत्रों के अनुसार, अप्रैल में 51, जून में पांच, जुलाई में एक और नवंबर में 11 सीटें खाली होंगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा, मधुसूदन मिस्त्री, कुमारी सैलजा, दिग्विजय सिंह, बीके हरिप्रसाद और एमवी राजीव गौड़ा का कार्यकाल अप्रैल और जून में खत्म हो रहा है।
इनमें से पार्टी वोरा, सैलजा और दिग्विजय को फिर से उच्च सदन भेज सकती है। वहीं राज बब्बर और पीएल पुनिया को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से फिर से निर्वाचित होना मुश्किल है। इन दोनों राज्यों में भाजपा फायदे में रहेगी। उत्तराखंड की एक और उत्तर प्रदेश की 10 सीटें इस साल नवंबर में खाली होंगी।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु से छह-छह, पश्चिम बंगाल, बिहार से पांच-पांच, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से चार-चार सांसदों का कार्यकाल खत्म होगा। इनमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार प्रमुख चेहरा हैं। कांग्रेस राजस्थान की तीन में से दो, मध्य प्रदेश की तीन में से दो, छत्तीसगढ़ से दो, महाराष्ट्र और कर्नाटक से एक-एक सीट पर अपने नेताओं को निर्वाचित करा सकती है। हालांकि उसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मेघालय और असम की सीटों को गंवाना पड़ेगा।
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को राज्यसभा में बहुमत हासिल नहीं है और उसे अहम बिलों को पास कराने के लिए बीजद, वाईएसआर कांग्रेस, एआईएडीएमके जैसे दलों की मदद लेनी पड़ती है। 245 सदस्यीय सदन में भाजपा के 82 और कांग्रेस के 46 सांसद हैं। सदन में 12 नामित सदस्य हैं जिनमें से छह ने खुद को भाजपा से संबंधित किया हुआ है।