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Kerala: केरल विधानसभा में भिड़े स्पीकर और नेता विपक्ष, वीडी सतीशन ने अपने भाषण बाधित करने का लगाया आरोप

Thu, 13 Feb 2025 02:00 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

विपक्ष के नेता ने बजट कटौती की आलोचना की, और तर्क दिया कि इससे एससी/एसटी समुदायों पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा, 'इन समुदायों के लिए आवंटन हर साल बढ़ना चाहिए, लेकिन इसके बजाय यह अपरिवर्तित रहता है। जब उन्होंने अपना भाषण जारी रखा, तो स्पीकर शमसीर ने हस्तक्षेप किया और उनसे इसे छोटा करने का अनुरोध किया। इससे सतीसन नाराज हो गए और उन्होंने पूछा कि स्पीकर उन्हें क्यों बाधित कर रहे हैं।
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केरल विधानसभा - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्षी यूडीएफ ने गुरुवार को केरल विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के भाषण को बाधित किया और एलडीएफ सरकार ने राज्य के बजट में एससी/एसटी समुदायों के लिए आवंटन कम कर दिया। इस हंगामे के बाद, अध्यक्ष एएन शमसीर ने कई विधेयकों को पारित करके समय से पहले काम पूरा करने के बाद विधानसभा को स्थगित कर दिया।
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अध्यक्ष और सतीशन के बीच तीखी नोकझोंक
राज्य के बजट में एससी/एसटी समुदायों के लिए धन के आवंटन में कथित कमी पर विपक्ष की तरफ से पेश किए गए स्थगन प्रस्ताव के दौरान, सतीशन ने स्पीकर पर विधानसभा में अपने भाषण को 'बाधित' करने का आरोप लगाया। हालांकि, अध्यक्ष एएन शमसीर ने आरोप से इनकार करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को पहले नौ मिनट तक बिना किसी रुकावट के बोलने की अनुमति दी गई थी। इसके कारण अध्यक्ष और सतीशन के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

विपक्ष ने वेल में पहुंचकर जताया विरोध
जब अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि आवंटित समय समाप्त हो गया है, तो सतीशन ने जवाब दिया कि सदन में बोलना उनका अधिकार है, न कि अध्यक्ष की ओर से उदारता का कार्य। हस्तक्षेप का विरोध करते हुए विपक्षी सदस्य सदन के वेल में आ गए, उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, 'विपक्ष के अधिकार अध्यक्ष की उदारता नहीं हैं।' हंगामे के बाद विधानसभा की ऑडियो बंद कर दी गई। 
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कांग्रेस विधायक का सरकार पर आरोप
इससे पहले, स्थगन की मांग करने वाले प्रस्ताव में कांग्रेस विधायक एपी अनिलकुमार ने आरोप लगाया कि राज्य के बजट में एससी/एसटी समुदायों के लिए धन और परियोजना आवंटन में कमी की गई है। उन्होंने वामपंथी सरकार पर पिछड़े वर्गों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया और इसे दलित विरोधी और आदिवासी विरोधी बताया। उन्होंने केआईआईएफबी के माध्यम से वित्तपोषित परियोजनाओं में भी एससी/एसटी समुदायों को दरकिनार करने के लिए सरकार की आलोचना की। 

विपक्ष के सभी दावों को मंत्री ने किया खारिज
हालांकि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के कल्याण मंत्री ओआर केलू ने कहा कि यह दावा करना गलत है कि कोई पहल नहीं की जा रही है। वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने भी प्रस्ताव को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि दलित समुदायों का समर्थन करने के प्रयास किए जा रहे हैं और सरकार पिछड़े वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता देती है। बाद में विपक्ष के नेता ने बजट कटौती की आलोचना की, और तर्क दिया कि इससे एससी/एसटी समुदायों पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा, 'इन समुदायों के लिए आवंटन हर साल बढ़ना चाहिए, लेकिन इसके बजाय यह अपरिवर्तित रहता है। 22 जनवरी को जारी एक आदेश ने परियोजना आवंटन में कटौती की पुष्टि की और उसके बाद 25 जनवरी को एक और आदेश जारी किया गया, जिसमें इसे और कम कर दिया गया।' 
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