आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि मुंबई हो या दिल्ली, श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचने के लिए इसी केंद्र सरकार ने कोई प्रबंध नहीं किया।
केंद्र का दावा है कि उसने अब तक 90 लाख लोगों को उसके घर पहुंचाया है। अगर इस काम में उसे 900 करोड़ की भी लागत आई है तो केंद्र को यही काम लॉकडाउन लागू करने से पहले लागू करना चाहिए था।
जिससे मजदूरों को पूरे परिवार के साथ पैदल न भटकना पड़ता, लोगों की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने हवाई सफर करने वाले उद्योगपतियों के लिए काम किया है, हवाई चप्पल पहनने वाले गरीबों के लिए नहीं।
कांग्रेस नेता नदीम जावेद ने कहा कि नरेंद्र मोदी को केंद्र में आए छह साल से ज्यादा का समय बीत चुका है।
उन्होंने 2014 में उत्तर प्रदेश और बिहार के युवाओं से वायदा किया था कि वे इन राज्यों में इतने उद्योग लगा देंगे कि उन्हें मजदूरी करने के लिए अपना घर छोड़कर मुंबई-गुजरात और कोलकाता नहीं जाना पड़ेगा।
लेकिन लॉकडाउन में जिस तरह गरीब मजदूरों को अपने घर पहुंचने के लिए सड़कों पर भटकना पड़ रहा है, लोगों की मौत हो रही है, वह यह साबित करने के लिए काफी है नरेंद्र मोदी सरकार ने अपना पहला ही वायदा नहीं निभाया है।
अगर प्रधानमंत्री ने अपना पहला वायदा निभाया होता तो आज सड़कों पर मजदूरों की ये दुर्दशा नहीं होती।
वहीं, दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूरे देश के साथ-साथ दिल्ली के लिए बहुत काम किया है।
ईस्टर्न-वेस्टर्न पेरीफेरल बनाने से 50 हजार ट्रकों को दिल्ली में घुसने से रोकना संभव हुआ है। इससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधरी है।
इसी प्रकार मेरठ एक्सप्रेस वे, मथुरा रोड पर बन रहा अंडर पास, धौलाकुआं लूप बनाने से आवागमन के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुधारने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि जबकि केंद्र सरकार ने पूरे देश को आयुष्मान योजना और गरीबों को आवास देने की सुविधा दी है, दिल्ली सरकार ने उसकी योजनाओं को लागू न कर दिल्लीवासियों को उस लाभ से वंचित रख उनके साथ विश्वासघात किया है।