लोकसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति को लेकर जवाब दे रहे थे। इस पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को विदेश मंत्री पर नहीं, किसी और देश (पाकिस्तान) पर भरोसा है।
लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विदेश नीति को लेकर विपक्ष के सवालों का विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया। इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि गृह मंत्री अमित शाह भड़क गए। विदेश मंत्री के संबोधन के दौरान जब विपक्ष ने हंगामा किया तो अमित शाह खड़े हो गए। उन्होंने विपक्ष को जमकर लताड़ा और यहां तक कह दिया कि ये लोग 20 साल तक उधर ही बैठे रहेंगे।
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लोकसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति को लेकर जवाब दे रहे थे। जब विदेश मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून के बीच कोई बात नहीं हुई। इस पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए।
उन्होंने कहा कि मेरी एक बात पर आपत्ति है कि भारत देश का शपथ लिए विदेश मंत्री यहां बयान दे रहे हैं, विपक्ष को उन पर भरोसा नहीं है। उनको किसी और देश (पाकिस्तान) पर भरोसा है। मैं समझ सकता हूं कि उनकी पार्टी में विदेश का महत्व क्या है? इसका मतलब यह तो नहीं है कि पार्टी की सारी चीजें यहां सदन में आकर थोपें। भारत के विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं करोगे। वोट लिया हुआ व्यक्ति यहां पर बोल रहा है। इसलिए आप विपक्ष में बैठे हैं और 20 साल तक वहीं बैठने वाले हैं।
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इसके बाद एक बार फिर जब विपक्ष ने टोकाटोकी की तो गृह मंत्री अमित शाह फिर से विदेश मंत्री के बचाव में उतरे। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष महोदय को विदेश मंत्री को संरक्षण देना चाहिए। उनके स्पीकर जब बोल रहे थे, तो हम पूरे धैर्य से सुन रहे थे। मैं बताऊंगा कि कितनी असत्य बातें बोली गईं। उनके असत्य को हम हलाहल समझकर पी रहे थे। अब उनमें सत्य सुनने की ताकत नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि अध्यक्ष महोदय को विदेश मंत्री को संरक्षण देना चाहिए। बैठे-बैठे टोकाटोकी करना सबको आता है। इतने गंभीर विषय पर चर्चा जब हो रही है तो सरकार के प्रमुख विभाग के मंत्री के बोलने पर बैठे-बैठे टोकाटोकी करना क्या विपक्ष को शोभा देता है? बाद में हम भी अपने सदस्यों को समझा नहीं पाएंगे।