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केरल पुलिस अधिनियम संशोधन को लेकर विपक्ष ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, जानें क्या है मामला

Mon, 23 Nov 2020 11:59 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
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केरल पुलिस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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केरल में साइबर अपराधों को रोकने के लिए लाए गए संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की मंजूरी मिल गई है। हालांकि, विपक्ष इसे लेकर भारी विरोध कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि इस कानून के जरिए अभिव्यक्ति की आजादी छीनने का प्रयास किया जा रहा है। अध्यादेश को लेकर विपक्ष ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

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केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के नेता एनके प्रेमचंद्रन, शिबू बेबी जॉन और एए अजीज ने केरल हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। इसमें केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118-ए को चुनौती दी गई है। अदालत कल इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।



गौरतलब है कि राज्यपाल ने शनिवार को माकपा की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार के केरल पुलिस अधिनियम में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी। अब सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पांच साल की सजा हो सकती है।
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विपक्ष बोला, अभिव्यक्ति की आजादी छीनने का प्रयास
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि अध्यादेश के जरिए अभिव्यक्ति की आजादी छीनने की कोशिश की जा रही है। राजभवन के सूत्रों के मुताबिक, कोविड-19 से उबरने के बाद आधिकारिक आवास पर लौटने के बाद राज्यपाल ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए। विपक्ष का कहना है कि यह संशोधन पुलिस को अधिक शक्ति देगा और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाएगा।  
 

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क्या है ये विवादित अध्यादेश

पिछले महीने राज्य कैबिनेट ने सेक्शन 118-ए को जोड़ने के साथ पुलिस को अधिक शक्ति देने का फैसला किया था। इस संशोधन के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अगर सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को जानबूझकर डराने और अपमान व बदनाम करने के लिए कोई आपत्तिजनक सामग्री डालता है या प्रसारित करता है, तो उसे पांच साल तक की सजा या दस हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

सरकार ने बचाव में यह दलील दी
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में केरल के आईटी एक्ट की धारा 66-ए और केरल पुलिस एक्ट के 118-डी को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस आधार पर इसे निरस्त किया कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। 

वहीं, केरल सरकार ने अपने पक्ष में कहा कि कोरोना महामारी के समय कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर नफरत भरी बातें पोस्ट कीं। इसके अलावा, अफवाहें भी बढ़ीं। साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों में वृद्धि हुई। 

सरकार ने कहा कि साइबर अपराधों के चलते नागरिकों की निजी जानकारी को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। केरल पुलिस के पास ऐसे अपराधों के निपटने के लिए शक्ति नहीं है, इसलिए यह अध्यादेश लाना पड़ा है।   
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