कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने गुरुवार को सरकार पर आरोप लगाया कि आम बजट में रेलवे में सार्वजनिक निजी साझेदारी, निगमीकरण और विनिवेश पर जोर दिया गया है जो निजीकरण पर ले जाने का रास्ता है। विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास करते हुए कहा कि सरकार को बड़े वादे करने की बजाए रेलवे की वित्तीय स्थिति सुधारने तथा सुविधा, सुरक्षा और सामाजिक जवाबदेही का निर्वहन सुनिश्चित करना चाहिए।
लोकसभा में साल 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि आम बजट में रेलवे में सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी), निगमीकरण और विनिवेश पर जोर दिया गया है जो भारतीय रेल का निजीकरण नहीं करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी में किए वादे के खिलाफ है।
वहीं, चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुनील कुमार सिंह ने कहा कि रेलवे पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित है और इसमें साफ-सफाई, सुगमता, सुविधाएं, समय की बचत और सुरक्षा आदि हर क्षेत्र में सुधार हो रहा है। अब सरकार का उद्देश्य रेलवे में वित्तीय अनुशासन लाना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे नित प्रतिदिन नए प्रतिमान, कीर्तिमान गढ़ रहा है। सरकार ने लगातार रेलवे के विस्तार के लिए काम किया है और जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं उन्हें पूरा भी किया जाएगा। सिंह ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर रेल बजटों में तमाम घोषणाएं और नई रेल लाइनों के शुरू करने का एलान करने लेकिन उन्हें पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार के समय किए गए वादों का 10 फीसदी भी काम नहीं किया गया। सिंह ने कहा कि कांग्रेस नीत सरकार के समय रेल बजट दबाव समूहों के प्रभाव में पेश किए जाते थे, लेकिन मोदी सरकार ने रेलवे को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए इसे आम बजट में शामिल किया। सरकार देश के लिए बजट पेश करती है।
भाजपा सांसद ने कहा कि साल 2009-14 में जहां रेलवे का पूंजी परिव्यय 2.3 लाख करोड़ था, वह 2014-19 में 4.97 लाख करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने कहा कि इस साल के बजट में पूंजी व्यय 1.6 लाख करोड़ रुपये प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है जो संप्रग सरकार के पहले पांच साल (2004-09) के कार्यकाल में रहे 1.25 लाख करोड़ रुपये के पूंजी व्यय से भी ज्यादा है।
चर्चा के दौरान द्रमुक की कनिमोझी ने कहा कि इस सरकार को हर समस्या का समाधान निजीकरण में दिखता है और वह भारतीय रेल में यही करने जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भारतीय रेल और दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश या निजीकरण का पुरजोर विरोध करती है।