विपक्ष ने मतगणना से पहले ही हार के कारण तलाश करने शुरू कर दिए थे। उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी, वीवीपैट से मिलान में कमी से लेकर ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग के सामने ये सभी आरोप निराधार साबित हुए।
राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इस बार आम चुनाव में चुनाव आयोग ने कुल 17.3 लाख वीवीपेैट इस्तेमाल किया था। इनमें से कुल 20,625 वीवीपैट का मिलान किया गया। एक भी वीवीपैट की पर्ची ईवीएम से मिसमैच नहीं हुई। बता दें कि 2014 के आम चुनाव में 4125 वीवीपैट का मिलान ईवीएम से किया गया था।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी ट्वीट कर कहा था कि 20 हजार 600 वीवीपैट का मिलान ईवीएम से किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई गई है।
सात चरणों के मतदान में 10.36 लाख ईवीएम इस्तेमाल हुईं। इनमें से केवल 1.3 प्रतिशत मशीनों में खराबी की शिकायत आई। रिजर्व मशीनों से उन्हें बदल दिया गया। परिणाम के बाद किसी भी विपक्षी नेता ने ईवीएम या वीवीपैट की शिकायत नहीं की।
केवल आंध्र प्रदेश में एक ईवीएम की गिनती वीवीपैट से न मिलने की शिकायत मिली थी। लेकिन, पुनर्गणना में यह शिकायत भी गलत साबित हुई। पहले 22 दलों के नेता ईवीएम की शिकायत करने चुनाव आयोग गए थे।
समाधान न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सौ फीसदी ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों की मिलान की मांग की। हालांकि अदालत ने हर विधानसभा क्षेत्र की पांच ईवीएम को वीवीपैट से मिलाने का आदेश कायम रखा था। चुनाव आयोग ने भी इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
मतदान के बाद और मतगणना से पहले विपक्षी दलों ने ईवीएम की सुरक्षा का मामला उठाया। लेकिन, चुनाव आयोग ने हर शिकायत का उचित निदान किया। हर जगह पाया गया कि जिन ईवीएम को बिना सुरक्षा के ट्रकों में लादा जा रहा था, वे रिजर्व थीं, जिनका मतदान के दौरान इस्तेमाल नहीं किया गया था। एक वरिष्ठ भाजपा नेता का कहना था कि परिणाम आने के बाद संभवतया कुछ लोग इन आरोपों पर भरोसा कर भी लेते अगर भाजपा जादुई आंकड़े के कुछ दूर रह जाती या बमुश्किल बहुमत पाती। लेकिन, उसे मिले प्रचंड बहुमत ने विपक्षी नेताओं की बोलती बंद कर दी है।