Hindi Name of Bills: लोकसभा में केंद्र सरकार की तरफ से बिलों के हिंदी नामों को लेकर विपक्षी सांसदों की तरफ से विरोध जताया गया है। जानकारी के मुताबिक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जैसे ही 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' पेश किया, इसपर कांग्रेस और डीएमके सांसदों ने आपत्ति दर्ज कराई।
लोकसभा में सोमवार को सरकार की तरफ से विधेयकों के हिंदी नाम रखे जाने को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जैसे ही 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' पेश किया, विपक्षी सांसदों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। आरएसपी(ए) के नेता एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि बिल का नाम इतना कठिन है कि उसका उच्चारण करना भी मुश्किल है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 348(बी) के अनुसार कानूनों के नाम अंग्रेजी में होने चाहिए, इसलिए हिंदी नाम रखना संविधान के खिलाफ है।
कांग्रेस और डीएमके सांसदों ने भी जताई आपत्ति
कांग्रेस सांसद जोतिमणि और डीएमके सांसद टी. एम. सेल्वगणपति ने भी बिल के नाम पर आपत्ति जताई। जोतिमणि ने कहा कि यह हिंदी थोपने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन-भाषा नीति का विरोध करने के कारण तमिलनाडु को पहले ही समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) का फंड नहीं मिला है। डीएमके के वरिष्ठ नेता टी. आर. बालू ने भी दक्षिणी राज्यों पर हिंदी थोपे जाने का मुद्दा उठाया और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
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यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक जैसे हिंदी नामों को लेकर विपक्ष ने विरोध किया था। ये कानून भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लाए गए हैं।
कानूनों के नाम को लेकर विपक्ष का तर्क
इसी तरह, भारतीय वायुयान विधेयक, जो 1934 के एयरक्राफ्ट एक्ट की जगह लाया गया, उस समय भी सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा था। विपक्ष का कहना है कि देश की भाषाई विविधता का सम्मान होना चाहिए और कानूनों के नाम ऐसी भाषा में हों, जिसे सभी आसानी से समझ सकें।