कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा का विषय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की मुलाकात रही। दोनों पहली बार किसी मंच पर साथ दिखे। दोनों आसपास की कुर्सियों पर बैठे और बड़ी गर्मजोशी से एक-दूसरे से बातचीत करते दिखे।
फूलपुर-गोरखपुर में लोकसभा उपचुनाव से ऐन पहले साथ आकर भाजपा को सियासी शिकस्त देने वाले सपा-बसपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना और नूरपुर उपचुनावों में एक साथ हैं। दोनों का साथ आना भाजपा के लिए 2019 में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
संयुक्त विपक्ष से बढ़ सकती है भाजपा की परेशानी
2014 के लोकसभा चुनाव में ज्यादातर राज्यों में विपक्ष के अलग-अलग लड़ने से भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल करने में सफलता मिली थी। 1999 के चुनाव में भाजपा 29 फीसदी से अधिक वोट हासिल करने के बावजूद 182 सीटें ही जीत पाई थी।
2014 में भाजपा महज 31 फीसदी वोट हासिल कर 283 सीटें जीतने में कामयाब रही। अब यूपी में सपा और बसपा ने हाथ मिलाया है, तो कर्नाटक में कांग्रेस, जदएस की बी टीम बनने के लिए तैयार हो गई है। ऐसे में पवार और ममता की कोशिश दूसरे राज्यों में भी बड़े दलों के नेतृत्व में भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने की है। संयुक्त विपक्ष भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है।