राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में विपक्ष की ओर से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने रखी। आजाद ने कहा कि हमें किसानों से लड़ाई नहीं करनी है वे हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय कृषि विधेयक राज्यसभा में आए थे उन्हें सेलेक्ट कमेटी या स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाता तो ऐसा न होता।
आजाद ने कहा कि 26 जनवरी को लाल किले पर जो कुछ कांग्रेस और विपक्ष की सभी पार्टी उसकी निंदा करती है। ये घटना लोकतंत्र के खिलाफ है और कानून व्यवस्था की दृष्टि से ठीक नहीं है। हमारे राष्ट्रीय झंडे का अपमान बेहद निंदनीय है। ऐसा करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
साथ ही सरकार को 26 जनवरी के बाद लापता लोगों की तलाश भी करनी चाहिए कि कहां चले गए। वहीं जो लोग निर्दोष हैं किसान नेताओं को फंसाने की कोशिश न की जानी चाहिए नहीं तो दूसरा आंदोलन होगा।
विपक्ष के नेता कहा कि किसान अंग्रेजों के जमाने से संघर्ष करते रहे हैं और हर बार उन्होंने शासन को झुकने पर मजबूर किया है। उन्होंने 1900 के दशक में पंजाब के आंदोलन का हवाला देते हुए लोकप्रिय गीत पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल का जिक्र किया।
किसान देश की सबसे बड़ी ताकत है उनसे लड़ाई कर हम किसी नतीजे पर नहीं पंहुच सकते। उन्होंने कहा कि लडऩा ही है तो चीन, पाकिस्तान और कोरोना वायरस से लड़ें। उन्होंने जय जवान-जय किसान नारे का जिक्त्रस् कर देश की सीमाओं पर ठंड में डटे जवानों को याद कर गलवान घाटी में शहीद हुए 20 जवानों को श्रद्धाजंलि दी।
अनूप वाजपेयी