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'लैटरल एंट्री से अपने लोगों को उच्च पदों पर बैठाना चाहती है भाजपा', विपक्ष को रास नहीं मोदी का फैसला

Sun, 10 Jun 2018 09:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लैटरल एंट्री के जरिये विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को केंद्र में वरिष्ठ अधिकारी बनाने का मोदी सरकार का फैसला विपक्ष को रास नहीं आया है। विपक्ष ने इसे संविधान और आरक्षण का मखौल बताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार इस फैसले के जरिए संघ और भाजपा के लोगों को मंत्रालयों में उच्च पदों पर बैठाना चाहती है। कांग्रेस ने इसे सरदार वल्लभ भाई पटेल के नजरिये के साथ खिलवाड़ भी बताया।

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भाजपा-संघ के लोगों को लाना चाहती है सरकार : कांग्रेस 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पूनिया ने कहा कि यह दरअसल पिछले दरवाजे से नौकरशाही में संघ और भाजपा के लोगों को बैठाने की साजिश है। शीर्ष स्तर पर अफसरों की बहाली के लिए संघ लोकसेवा आयोग है। आयोग देश भर के चुनिंदा प्रतिभावान युवाओं का परीक्षा के जरिये चयन करता है। इस प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाना खतरनाक है। बार-बार पटेल का नारा लगाने वाली मोदी सरकार को पता होना चाहिए कि खुद उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध किया था। उन्होंने साफ कहा था कि तय प्रक्रिया के इतर चुनकर लाए गए लोगों की तुलना में दूसरे लोगों को प्रभावशाली नहीं बनाया जाना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने कहा, यह संविधान, आरक्षण का मखौल

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने इसे आरक्षण और संविधान के खिलाफ साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के इतर ऐसी नियुक्तियों में आरक्षण का प्रावधान नहीं है। यह संघ लोकसेवा आयोग जैसी संस्था को बर्बाद करने की साजिश है। इसे पूरी तरह से असंवैधानिक बताते हुए यादव ने इसके खिलाफ मोर्चा खोलने की घोषणा की है। मोदी सरकार ने संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए लैटरल एंट्री व्यवस्था को अधिसूचना के जरिये मंजूरी दे दी है।

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