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चुनाव से ठीक पहले आम बजट पेश करने पर सियासी विवाद

Fri, 06 Jan 2017 01:05 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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ठीक पांच साल पहले जब इन्हीं पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम घोषित हुए थे, तब संसद में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने यूपीए सरकार को आम बजट की तारीख बदलने के लिए बाध्य कर दिया था। तब वर्तमान की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरह भाजपा ने सरकार के लिए मोर्चा खोलते हुए इसी तरह चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी।
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दबाव में झुकते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने साल 2012 में पूर्व घोषित तारीख 1 मार्च की जगह 16 मार्च को आम बजट पेश किया था। दिलचस्प तथ्य यह है कि तब भाजपा सहित अन्य विपक्षी दल आम बजट में लोकलुभावन घोषणाओं के कारण आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन होने की आशंका जता रहे थे। 

गौरतलब है कि पांच साल पूर्व भी उत्तर प्रदेश समेत अन्य चार राज्यों में फरवरी-मार्च महीने में ही विधानसभा चुनाव घोषित हुए थे। हालांकि चुनाव के दौरान आम बजट पेश होना कोई नई बात नहीं है। कई बार अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव की संभावनओं के मद्देनजर आम तौर पर मार्च में पेश होने वाले आम बजट को बहुत जल्दी पेश किया गया। कई बार अंतरिम बजट का सहारा लिया गया। 
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साल 2013 में तो यूपीए सरकार ने दिसंबर में ही आम बजट पेश कर दिया था। जबकि साल 2011 में तमिलनाडु में चुनाव घोषित होने के कारण आम बजट पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं हुई थी। चूंकि इस बार सरकार ने आम बजट पेश करने की जानकारी पहले ही चुनाव आयोग को दे दी थी, इसलिए उसका तर्क है कि ऐसे में विपक्ष का विरोध बेमानी है।
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