उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा नीत एनडीए के उम्मीदवार के एलान करने के बाद विपक्षी दलों ने भी रविवार को अपने प्रत्याशी का एलान कर दिया। विपक्ष ने मार्गरेट अल्वा को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। एनसीपी चीफ शरद पवार ने इनके नाम का एलान किया। इससे पहले एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के घर पर विपक्षी दलों की बैठक हुई। इसमें उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा हुई। इसके बाद अल्वा के नाम का एलान किया गया।
राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि हमने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह किसी सम्मेलन में व्यस्त थीं। हमने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी संपर्क करने की कोशिश की। उन्होंने कुछ दिन पहले यशवंत सिन्हा के लिए समर्थन की घोषणा की और जल्द ही मार्गरेट अल्वा के लिए अपने समर्थन की घोषणा करेंगे। बताया जा रहा है कि अल्वा 19 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगी।
विपक्ष की उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने ट्वीट किया कि यह एक सम्मान की बात है। मैं इस नामांकन को बड़ी विनम्रता के साथ स्वीकार करती हूं और विपक्ष के नेताओं को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास किया है।
राउत ने किया समर्थन का एलान
बैठक के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू एक आदिवासी महिला हैं और देश में आदिवासियों के लिए भावना है। हमारे कई विधायक-सांसद भी आदिवासी समुदाय से हैं। इसलिए हमने उसका समर्थन किया, लेकिन यहां इस गठबंधन में हम समर्थन करेंगे।
टीएमसी 21 को साफ करेगी अपना रुख : सौगत रॉय
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने रविवार को कहा कि उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर पार्टी 21 जुलाई को अपना रुख स्पष्ट करेगी। टीएमसी का यह बयान एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार द्वारा उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए 17 विपक्षी दलों की संयुक्त उम्मीदवार मार्ग्रेट अल्वा के नाम के एलान के कुछ देर बाद आया। वरिष्ठ पार्टी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि ममता बनर्जी की अध्यक्षता में 21 जुलाई को होने वाली बैठक में पार्टी के सभी सांसद शामिल होंगे। पार्टी इस दिन को शहीद दिवस के तौर पर मनाती है। उन्होंने कहा कि पार्टी इसी दिन उपराष्ट्रपति की उम्मीदवारी पर एलान करेगी।
जानें अल्वा के बारे में
मारग्रेट अल्वा का जन्म 14 अप्रैल 1942 को मंगलुरु में हुआ था। अल्वा की पढ़ाई बंगलुरु में हुई। 24 मई 1964 में उनकी शादी निरंजन अल्वा से हुई। उनकी एक बेटी और तीन बेटे हैं। निरंजन अल्वा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भारतीय संसद की पहली जोड़ी जोकिम अल्वा और वायलेट अल्वा के पुत्र हैं।
राजनीतिक सफर
अल्वा 1974 में पहली बार राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं। उन्होंने छह-छह साल के चार कार्यकाल लगातार पूरे किए। इसेक बाद वे 1999 में वे लोकसभा के लिए चुनी गईं। उन्हें 1984 में संसदीय कार्य राज्यमंत्री और बाद में युवा मामलात और खेल, महिला एवं बाल विकास के प्रभारी का दायित्व संभाला। 1991 में उन्हें कार्मिक, पेंशन, जन अभाव अभियोग और प्रशासनिक सुधार राज्यमंत्री का जिम्मा दिया गया था। अल्वा कई राजस्थान, गोवा समेत कई राज्यों की राज्यपाल रह चुकी हैं।
छह अगस्त को चुनाव
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना पांच जुलाई को जारी हो चुकी है। उम्मीदवार इसके लिए 19 जुलाई तक नामांकन दाखिल कर सकते हैं। चुनाव के लिए आयोग ने छह अगस्त की तारीख तय की है। देश के मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 11 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
राष्ट्रपति चुनाव से कितना अलग है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
- संसद के दोनों सदनों के सदस्य वोट डालते हैं: उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है। संसद के दोनों सदनों के सदस्य इसमें हिस्सा लेते हैं। हर सदस्य केवल एक वोट ही डाल सकता है। राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचित सांसदों के साथ-साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है।
- मनोनीत सांसद भी डाल सकते हैं वोट: राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सांसद वोट नहीं डाल सकते हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसा नहीं है। उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसे सदस्य भी वोट कर सकते हैं। इस तरह से देखा जाए तो उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के 790 निर्वाचक हिस्सा लेते हैं। इसमें राज्यसभा के चुने हुए 233 सदस्य और 12 मनोनीत सदस्यों के अलावा लोकसभा के 543 चुने हुए सदस्य और दो मनोनीत सदस्य वोट करते हैं। इस तरह से इनकी कुल संख्या 790 हो जाती है।