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Politics: RSS प्रमुख के बयान पर विपक्ष हमलावर, कहा- मोहन भागवत ने एक महीने में दो विरोधाभासी बातें कहीं

Fri, 29 Aug 2025 10:50 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोहन भागवत ने कहा था कि मैंने कभी ऐसा नहीं कहा मैं सेवानिवृत्त हो जाऊंगा या किसी और को 75 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। इस बयान पर कांग्रेस, सपा और एआईएमआईएम प्रमुख ने हमला बोला है। 
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी। - फोटो : ANI
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विस्तार
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों पर विपक्ष ने हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्होंने एक महीने से अधिक समय में विरोधाभासी बयान दिए हैं।। कांग्रेस ने यह आरोप मोहन भागवत के उस बयान पर लगाया जिसमें उन्होंने कहा था कि मैंने कभी ऐसा नहीं कहा मैं सेवानिवृत्त हो जाऊंगा या किसी और को 75 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मोहन भागवत के बयान पर सवाल उठाए।
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कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एक महीना, एक व्यक्ति, दो विरोधाभासी बयान। उन्होंने भागवत के गुरुवार और जुलाई के बयानों पर मीडिया रिपोर्टों को भी टैग किया। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने भी 75 साल की उम्र में रिटायर होने के बारे में भागवत के स्पष्टीकरण पर कहा कि पर्दे के पीछे ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपना बयान बदलना पड़ा?

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मुझे याद है कि कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि जब आप 75 साल के हो जाएं तो आपको एक तरफ हट जाना चाहिए और दूसरों को काम करने देना चाहिए। तो फिर भाजपा के दिग्गज नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र की क्या गलती थी कि उन्हें 75 वर्ष की आयु के बाद मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया गया?
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समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने हिंदी में एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मैं न तो सेवानिवृत्त होऊंगा और न ही होने दूंगा। जब अपनी बारी आई, तो नियम बदल दिए गए। यह दोहरा मापदंड ठीक नहीं है। जो अपनी बात से पलट जाते हैं, उन पर कोई भरोसा नहीं करता। जो विश्वास खो देते हैं, वे सत्ता खो देते हैं।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी भागवत पर दोहरी बात बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह आरएसएस द्वारा प्रायोजित और समर्थित संगठन हैं जो मुसलमानों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देते हैं। वास्तव में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान मुसलमानों के खिलाफ नफरत को संस्थागत रूप दिया गया है। आरएसएस अपनी स्थापना के बाद से लगातार यह झूठ फैलाता रहा है कि जिस तरह से देश में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, वह हिंदू आबादी पर कब्जा कर लेगा।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि मुसलमानों की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) में कमी आई है। इसमें गिरावट किसी भी अन्य धर्म की तुलना में अधिक है। जब 1871-72 में पहली जनगणना हुई थी, तब देश में हिंदुओं की आबादी 73 प्रतिशत थी, जबकि मुसलमानों की 21 प्रतिशत थी। 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या बढ़कर 79.8 प्रतिशत और मुसलमानों की जनसंख्या बढ़कर 14.23 प्रतिशत हो गई।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि वे आज भारत के पास मौजूद महान जनसांख्यिकीय लाभांश के बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? आप इस देश के युवाओं को रोजगार देने में विफल रहे हैं। अब आप लोगों को तीन बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आप कौन होते हैं लोगों के पारिवारिक जीवन में दखल देने वाले? आप भारतीय महिलाओं पर बोझ क्यों डालना चाहते हैं। उनकी अपनी प्राथमिकताएं हो सकती हैं? यह आरएसएस का दोहरा चरित्र है।

मुस्लिम विद्वानों ने किया स्वागत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मोहन भागवत के बयान भारत में इस्लाम के लिए हमेशा जगह रहेगी का मुस्लिम विद्वानों ने स्वागत किया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों से गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए और उन्हें एक साथ लाने के प्रयास किए जाने चाहिए।

उत्तर प्रदेश के प्रख्यात मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महाली ने आरएसएस प्रमुख की इस्लाम और मुस्लिम समुदाय के बारे में टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा कि हमें एक साथ आना चाहिए और अच्छे माहौल में देश को प्रगति के पथ पर ले जाना चाहिए। भागवत ने कहा कि हिंदू धर्म किसी अन्य धर्म का विरोध नहीं करता। एक तरह से उन्होंने इस्लाम का समर्थन किया। हम इसका स्वागत करते हैं।

महाली ने भागवत के इस कथन का भी स्वागत किया कि आरएसएस काशी और मथुरा को पुनः प्राप्त करने के किसी भी आंदोलन में भाग नहीं लेगा। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताया, लेकिन भारतीय परिवारों में बच्चों की संख्या के बारे में उनके विचार से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में जो हुआ, उससे देश को कितना नुकसान हुआ, यह सबके सामने है। ऐसी बातें दोहराई नहीं जानी चाहिए। बार-बार मंदिर-मस्जिद का मुद्दा उठाने से लोगों और देश को नुकसान होता है।
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