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कांग्रेस संगठन में युवाओं को मौका, बदलाव में राहुल के करीबी हावी

Fri, 15 Jun 2018 08:57 PM IST
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस में एक आमूलचूल परिवर्तन का दौर शुरू हो गया है। कभी पार्टी में खास ओहदा रखने वाले जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह और सुशील कुमार शिंदे जैसे सोनिया के करीबी नेताओं की जगह पर रजनी पाटिल, दसारी अनुसुइया, सुधांशु त्रिपाठी, हर्ष वर्धन सपकल और वर्षा गायकवाड़ जैसे नए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं क्योंकि वे राहुल गांधी के विश्वासपात्र हैं।

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे। वे हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय प्रभारी भी थे। लेकिन दस दिन पहले राहुल गांधी ने उन्हें महासचिव पद से हटा दिया। उनकी जगह महाराष्ट्र से पहली बार राज्य सभा सदस्य बनी रजनी पाटिल को हिमाचल का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया। गुजरात में हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी जैसे क्षेत्रीय नेताओं को साथ लाकर विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाले अशोक गहलोत को भी राज्य के प्रभार की जिम्मेदारी से मुक्त कर किया गया है। 

पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन मंत्री रहे सुधांशु त्रिपाठी को राष्ट्रीय सचिव बनाकर गुजरात का प्रभार सौंप दिया गया। अब गहलोत के पास केवल संगठन और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी है। इनके अलावा हर्षवर्धन सपकल और वर्षा गायकवाड़ को मध्य प्रदेश का प्रभार दिया गया है, जहां छह महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। महाराष्ट्र निवासी सपकल पहली बार एमएलए चुने गए हैं जबकि गायकवाड़ मुंबई की धारावी से तीसरी बार विधायक हैं। 
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पहली बार सांसद बने पैंतीस वर्षीय गौरव गोगोई को पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार का प्रभारी बनाया गया है तो तमिलनाडु के पूर्व विधायक ए चेलाकुमार को गोवा का। इलाहाबाद से चार बार विधायक रहे अनुग्रह नारायण सिंह को उत्तराखंड का प्रभार दिया गया है। इसी तरह असम से पहली बार सांसद चुनी गईं सुष्मिता देब को महिला कांग्रेस का अध्यक्ष, तेलंगाना की पूर्व विधायक डी अनुसुइया उर्फ सीतक्का को महासचिव और फातिमा रोसना को सचिव नियुक्त किया गया है।

युवाओं के हाथ नेतृत्व

एआईसीसी में नियुक्त किए गए 47 सचिवों की औसत उम्र 41 साल है और इनमें 21 विधायक और नौ सांसद (पूर्व और वर्तमान) हैं जबकि तीनों संयुक्त सचिवों की उम्र और भी कम है। बुजुर्ग कहीं कहीं अभी भी कार्यकारिणी में है, हालांकि सबसे वरिष्ठ 89 वर्षीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा हैं। हालांकि उनकी जगह राहुल के करीबी कनिष्क सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया जा सकता है। 11 महासचिवों में अभी भी ओमन चंडी, सीपी जोशी, अंबिका सोनी और गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेता हैं। 

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