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Waqf Bill: जगदंबिका पाल पर विपक्षी सदस्यों ने 'एकतरफा' फैसलों का लगाया आरोप, JPC से अलग होने के दिए संकेत

Mon, 04 Nov 2024 08:00 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Waqf (Amendment) Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच कर रही संसदीय समिति के विपक्षी सांसद मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे और समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल के कथित एकतरफा फैसलों और कार्यवाही को बाधित करने के प्रयासों का विरोध करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि वे समिति से खुद को अलग कर सकते हैं।
 
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जगदम्बिका पाल, अध्यक्ष, संसदीय समिति वक्फ (संशोधन) विधेयक - फोटो : ANI
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विस्तार
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वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति में शामिल तमाम विपक्षी सदस्यों ने समीति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल पर एकतरफा फैसले करने और पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। जिसके बाद उन सभी के इस समिति से खुद को अलग करने का संकेत मिल रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक ये विपक्षी सांसद मंगलवार को इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने वाले हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के नाम लिखे पत्र में यह दावा भी किया कि समिति की कार्यवाही में उनको अनसुना किया गया और ऐसे में वे इस समिति से खुद को अलग करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

किन-किन सदस्यों ने लिखा ओम बिरला को पत्र
ओम बिरला को लिखे अपने पत्र में विपक्षी सदस्यों ने प्रस्तावित कानून के खिलाफ आपत्तियों समेत अपनी चिंताओं का उल्लेख किया है। वहीं विपक्ष से जुड़े सूत्रों का कहना था कि विपक्षी सदस्य ओम बिरला से मिलकर उनको यह पत्र को सौंपेंगे। बता दें कि द्रमुक सांसद ए. राजा, कांग्रेस के मोहम्मद जावेद और इमरान मसूद, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी समेत विपक्षी सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष के नाम पत्र लिखा है।
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विपक्षी सांसदों का जगदंबिका पाल पर आरोप
विपक्षी सांसदों ने भाजपा के अनुभवी सांसद जगदंबिका पाल पर आरोप लगाया कि समिति के अध्यक्ष ने बैठकों की तारीखें तय करने और समिति के समक्ष किसे बुलाया जाए, यह तय करने में 'एकतरफा निर्णय' लिया है। उनका कहना है कि वे कभी-कभी समिति की तीन दिनों की लगातार बैठक बुला देते हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों के लिए बिना तैयारी के अपनी बात रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

सांसदों ने समिति से अलग होने के दिए संकेत
अपने पत्र में, विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह करेंगे कि वह जगदंबिका पाल को समिति के सदस्यों के साथ औपचारिक परामर्श करने का निर्देश दें ताकि देश को भरोसा दिलाया जा सके कि समिति स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं से विचलित हुए बिना और बिना किसी पूर्वाग्रह के तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम कर रही है। इस पत्र आगे में कहा गया है, 'अन्यथा, हम विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हैं कि हमें समिति से हमेशा के लिए अलग होने के लिए विवश किया जा सकता है क्योंकि हमें अनसुना किया गया है।

विपक्षी सांसदों ने भी विधेयक के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और दावा किया है कि सरकार का कदम 1995 और 2013 के पहले के कानूनों को कम करने का एक प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक में मौजूदा अधिनियम में 100 से अधिक संशोधन का प्रस्ताव है जबकि सरकार का केवल 44 संशोधनों का दावा है। जमात-ए-इस्लामी हिंद समेत कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि विधेयक पर अपनी राय रखने के लिए सोमवार को समिति के सामने उपस्थिति हुए।

जगदंबिका पाल ने सांसदों के आरोपों को किया खारिज
वहीं समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इन आरोप को खारिज कर दिया है कि उन्होंने विपक्षी सदस्यों को अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति नहीं दी। उनका कहना था कि उन्होंने सुनिश्चित किया है कि हर किसी की बात को सुना जाए।
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