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कहानी तंगेल एयरड्रॉप की: 52 विमानों से 700 पैराशूटर्स का धावा, फिर 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने टेके घुटने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 26 Jan 2024 03:37 PM IST

सार

Tangail Airdrop: 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय वायुसेना ने फ्लाई-पास्ट के दौरान तंगेल फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप को याद करने के लिए किया गया।
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ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप - फोटो : Amar Ujala
देश इस वर्ष अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस साल के गणतंत्र दिवस परेड में बहुत कुछ नया देखने को मिला। जहां तीनों सेनाओं की एक महिला टुकड़ी ने मार्च किया तो वहीं दूसरी ओर वायुसेना के विमान ने आसमान में तंगेल आकृति भी बनाई। इसका उद्देश्य 1971 में हुए भारत और पाकिस्तान युद्ध में सफल ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप को सम्मानित करना था।

आइये जानते हैं कि तंगेल फॉर्मेशन क्या है? इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है? 75वें गणतंत्र दिवस में कैसे हुआ तंगेल निर्माण?
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ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप - फोटो : Amar Ujala
देश इस वर्ष अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस साल के गणतंत्र दिवस परेड में बहुत कुछ नया देखने को मिला। जहां तीनों सेनाओं की एक महिला टुकड़ी ने मार्च किया तो वहीं दूसरी ओर वायुसेना के विमान ने आसमान में तंगेल आकृति भी बनाई। इसका उद्देश्य 1971 में हुए भारत और पाकिस्तान युद्ध में सफल ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप को सम्मानित करना था।

आइये जानते हैं कि तंगेल फॉर्मेशन क्या है? इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है? 75वें गणतंत्र दिवस में कैसे हुआ तंगेल निर्माण?

ऑपरेशन तंगेल एयरड्रॉप - फोटो : Amar Ujala
तंगेल फॉर्मेशन क्या है?
भारतीय वायुसेना ने फ्लाई-पास्ट के दौरान तंगेल फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। तंगेल बांग्लादेश के एक स्थान का नाम है जो एक जिला भी है। दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के दौरान इसी क्षेत्र में भारतीय सेना ने ऑपरेशन एयरड्रॉप को अंजाम दिया था जिसमें एक साथ 52 विमानों में करीब 700 पैराशूटर्स नीचे लड़ाई के लिए कूदे थे। इस अभियान ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

 

1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
...तो क्या था ऑपरेशन एयरड्रॉप?
11 दिसंबर 1971 की  तारीख थी जब भारत और पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था। इसमें अलग बांग्लादेश की लड़ाई भी शामिल थी। पाकिस्तान की सेना ने ढाका पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से अपनी सेना की 93वीं इन्फेंट्री ब्रिगेड के हजारों सैनिकों की ढाका की तरफ रवाना कर दिया।

पाकिस्तानी सेना के इस कदम की भनक भारतीय सेना को लग गई। इसके बाद लेफ्टिनेंट कर्नल कुलदीप सिंह पन्नू की अगुवाई में भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स की एक बटालियन ने तंगेल इलाके में एयरड्रॉप किया। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना के 52 विमानों से करीब 700 पैराट्रूपर्स कूदे थे। साथ ही जवानों के हथियारों और वाहनों को भी एयर ड्रॉप किया गया।

 

1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध - फोटो : Social media
ऑपरेशन एयरड्रॉप क्यों अहम था?
तंगेल में यमुना नदी पर पुंगली पुल था, जो ढाका जाने का रास्ता था। भारतीय सैनिकों ने इस पुल पर पाकिस्तानी सेना पर हमला बोल दिया और साथ ही इस पुल को तबाह कर दिया। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट के 2 पैरा शामिल थे।

इस ऑपरेशन की वजह से पाकिस्तानी सेना को मुंह की खानी पड़ी। माना जाता है कि ऑपरेशन एयरड्रॉप के बाद ही पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी के नेतृत्व में आत्मसमर्पण करने का रास्ता साफ हो गया था। 13 दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना के बहादुरी और शौर्य के सामने पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। 16 दिसंबर 1971 को शाम 4.35 बजे पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.के.नियाजी ने 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का ये सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था। इसके साथ ही दुनिया के मानचित्र पर एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का उदय हुआ। 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत की विजय और बांग्लादेश के निर्माण ने पूरी दुनिया में जहां भारत का सम्मान बढ़ाया वहीं भारत ने दिखा दिया कि मानवता की रक्षा और अपनी सुरक्षा के लिए वह पूरी तरह से सक्षम और समर्थ है।

 

गणतंत्र दिवस - फोटो : PIB
अब गणतंत्र दिवस में तंगेल फॉर्मेशन कैसे दिखाया गया?
75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड के दौरान भारतीय वायुसेना के विमान ने तंगेल फॉर्मेशन में उड़ान भरी। इस फ्लाइपास्ट के दौरान वायुसेना का हेरिटेज विमान डाकोटा और दो डॉर्नियर डीओ-228 विमान ने उड़ान भरी। खास बात यह है कि इन विमानों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल और बायो-फ्यूल के मिश्रण से तैयार किए फ्यूल से उड़ान भरी।
 
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