भारतीय सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान के आतंकी ठिकाने तबाह कर दिए। इसके अलावा पाकिस्तानी रेंजर्स के ठिकानों पर भी बीएसएफ ने खूब मार की। देश में 220 साल पुराने आयुध कारखानों में निर्मित हथियारों की मदद से बीएसएफ ने सत्तर से अधिक ठिकानों पर निशाना साधा। पाकिस्तानी सेना के बंकर, बख्तरबंद गाड़ियां, और टावर उड़ा दिए गए। इन स्वदेशी हथियारों में बहु-कैलिबर एन्टी मटेरियल राइफल (एएमआर), जिसकी रेंज 1800 मीटर तक बताई जाती है, भी शामिल है। एंटी-मटेरियल राइफल को 'विध्वंसक' के नाम से जाना जाता है। इसे आयुध निर्माणी 'तिरुचिरापल्ली' में तैयार किया गया है।
बीएसएफ ने मंगलवार को पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' में इस्तेमाल किए गए हथियारों को सार्वजनिक किया था। इन्हीं स्वदेशी हथियारों में पाकिस्तान के टावर-बंकर उड़ाने वाली राइफल 'विध्वंसक' भी शामिल रही। 'विध्वंसक की रेंज 1300 से 1800 मीटर रही है। इसे 2000 के दशक के आखिर में सुरक्षा बलों को मुहैया कराया गया था। एएमआर 'विध्वंसक' को हाई वेल्यू टारगेट के लिए जाना जाता है। इसकी मदद से एयरक्रॉफ्ट और हेलिकॉप्टर को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह घातक हथियार वॉल के परे जाकर अटैक करता है। 'विध्वंसक' को रात के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी मदद से टैंक पर लगे आर्मर्ड थर्मल इमेजर को भी नष्ट किया जा सकता है।
एएमआर 'विध्वंसक' में मल्टी बैरल 14.5× 114 होता है। इसका वजन 29 किलोग्राम होता है। ओवरआल लंबाई 2.015 मीटर और बैरल 8 ग्रुव्ड, 1.22 एम रहता है। राइफल की पिच 1:420एमएम और नालमुख वेग 1,080 एम/एस होता है। इसकी मारक रेंज 1800 मीटर तक होती है।
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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी.श्रीकुमार बताते हैं, ऑपरेशन सिंदूर में आयुध कारखानों ने भी अपनी भूमिका निभाई है। ओएफटी द्वारा निर्मित मल्टीपल कैलिबर इंडिविजुअल वेपन सिस्टम, जीसीएफ जबलपुर की L70 गन, जीएसएफ कासीपुर आदि, ऑपरेशन सिंदूर ऑपरेशन का हिस्सा थे। राफेल फाइटर जेट, ब्रह्मोस आदि का उपयोग करके उन्नत युद्ध प्रणाली के नाम पर आयुध कारखानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
श्रीकुमार ने कहा, आयुध कारखानों को मजबूत करने की जरूरत है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन-हाउस आरएंडडी को मजबूत किया जाना चाहिए। डीआरडीओ को इसके लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के बजाय आयुध कारखानों के साथ हाथ मिलाना चाहिए। आयुध कारखानों को ओएफबी के रूप में वापस लाया जाना चाहिए। कौशल को बनाए रखने और युद्ध रिजर्व को बनाए रखने के लिए कुशल मानव शक्ति की भर्ती तुरंत शुरू होनी चाहिए।