बदलते राजनीतिक-सैन्य लक्ष्यों के बीच युद्ध लड़ने के अमेरिका, इस्राइल और रूस के प्रयोगों ने यह दर्शाया है कि 21वीं सदी के युद्ध और संघर्ष अक्सर लंबे एवं अस्पष्ट अभियानों में बदल गए हैं। इनके नतीजे संबंधित क्षेत्र के लिए विनाशकारी बन गए हैं और अखिरकार पहल करने वाले को ही इनका फायदा नहीं मिल पाया है। तालिबान, इराक, यूक्रेन, गाजा और अब ईरान का संघर्ष यह बतलाता है कि सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य अनिश्चितकाल तक दबाव बनाए रखना नहीं होता है। इसका उद्देश्य निर्णायक रणनीतिक नतीजे हासिल करना और फिर ज्यादा ताकतवर सैन्य शक्ति द्वारा तय की गई अनुकूल शर्तों पर पीछे हट जाना होता है।
ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत द्वारा व्यक्त की गई प्रतिक्रिया ने दुनिया की सैन्य शक्तियों, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने अपनाए जाने लायक एक ठोस विकल्प पेश किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने अनगिनत बार युद्धविराम का झूठा श्रेय लिया है, लेकिन वह ईरान को सैन्य एवं आर्थिक रूप से तबाह कर देने के बावजूद युद्धविराम का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए हैं। ऑपरेशन सिंदूर सुनियोजित बल प्रयोग का एक ऐसा उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया और उन उद्देश्यों को हासिल कर लेने के बाद अनुशासित संयम भी बरता गया।
आतंकवादियों की क्रूर हरकत का सुनियोजित तरीके से दिया गया जवाब
ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के स्थापित सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा की गई उकसावे की एक क्रूर हरकत के बाद शुरू किया गया था। इस हरकत के तहत आतंकवादियों ने धर्म के आधार पर केवल पुरुषों की पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के सामने बेरहमी से हत्याएं कीं। इसके बाद न तो भावावेश में आकर तनाव बढ़ाया गया और न ही अंधाधुंध प्रतिशोध लिया गया, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से जवाब दिया गया। हर कदम सोच-समझकर, लेकिन तेजी से उठाया गया। ये कदम दंडात्मक और विध्वंसात्मक दोनों ही थे। इन कदमों को अलग-अलग ठिकानों को तबाह करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। यह क्षमता और इरादे, दोनों का संकेत था।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए चलाया गया ऑपरेशन
भारत की रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता राजनीतिक-सैन्य उद्देश्यों को लेकर स्पष्टता थी। इसका लक्ष्य सीमा-पार आतंकवाद के लिए जिम्मेदार बुनियादी ढांचे एवं तत्वों पर तत्काल और ठोस प्रहार करना तथा प्रतिरोध को फिर से स्थापित करना था। यह सब परमाणु सुरक्षा कवच और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहते हुए किया गया। अहम परिसंपत्तियों को तेजी से नष्ट करके और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को मनोवैज्ञानिक आघात पहुंचाकर इन लक्ष्यों को हासिल करने के बाद भारत ने संघर्ष को रोक दिया।
भारत ने किया दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन
भारत का दृष्टिकोण युद्ध में तनाव को नियंत्रित रखने के महत्व को रेखांकित करता है, क्योंकि आधुनिक युद्ध केवल बल प्रयोग तक ही सीमित नहीं होते हैं, बल्कि इसमें शत्रु और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, दोनों की धारणाओं को नियंत्रित करना भी शामिल होता है। अपनी प्रतिक्रिया को संतुलित रखकर, भारत ने कोई जल्दबाजी दिखाए बिना दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। इससे यही संकेत मिला है कि भारत निर्णायक कार्रवाई करने को जितना तैयार है, उतना ही वह अनियंत्रित संघर्षों को रोकने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
कूटनीति का महत्वपूर्ण पाठ
ऑपरेशन सिंदूर पर विराम लगाने के बाद देश ने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को यह चेतावनी देते हुए दीर्घकालिक लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाया है कि यदि उसने कोई और गलती करने की हिम्मत की, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ सैन्य प्रभावशीलता का एक उदाहरण भर नहीं है, बल्कि कूटनीति का एक महत्वपूर्ण पाठ भी है।
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