Indian Navy: एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय नौसेना की निरंतर तत्परता और तेजी से तैनाती की क्षमता को दर्शाया। इस ऑपरेशन में पहलगाम हमले के 96 घंटे के भीतर नौसेना ने आक्रामक रणनीति अपनाकर पाकिस्तान की नौसैनिक शक्ति को अपने बंदरगाहों तक सीमित कर दिया।
एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने रविवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने युद्ध के लिए भारतीय नौसेना की तत्परता को दर्शाया। पहलगाम हमले के बाद तेजी से तैनाती, हथियारों से गोलीबारी और आक्रामक रणनीति अपनाने से पाकिस्तान की नौसैनिक शक्ति अपने ही बंदरगाहों तक सीमित रह गई।
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नौसेना प्रमुख ने कहा, जब वैश्विक समुद्र अशांत होते हैं, तो दुनिया एक स्थिर प्रकाश स्तंभ की तलाश करती है। भारत वह भूमिका निभा सकता है और भारतीय नौसेना की समुद्री कार्रवाई इस जिम्मेदारी को दर्शाती है। यह बात उन्होंने पुणे शाखा के नौसेना फाउंडेशन की ओर से आयोजित एडमिरल जेजी नाडकर्णी स्मारक व्याख्यान में कही। इसका विषय 'भारतीय नौसेना-भूराजनीतिक, प्रौद्योगिकी और रणनीति के बदलते परिदृश्य में संचालन' था।
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय नौसेना युद्ध के लिए हमेशा तत्पर रहती है, भले ही संघर्ष की तीव्रता कम ही क्यों न हों। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। आज संघर्ष अचानक होते हैं, जिससे हमेशा तैयार रहने की रणनीति जरूरी हो गई है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में नौसेना की तत्परता स्पष्ट हुई। 26 अप्रैल को पहलगाम हमले के 96 घंटे के भीतर नौसैनिक सुविधा को तेजी से तैनात किया गया, कई हथियारों से गोलीबारी की गई, आक्रामक रणनीति अपनाई गई और उत्तर भारतीय सागर में कैरियर बैटल ग्रुप की मौजूदगी से पाकिस्तान नौसेना को अपने तट या बंदरगाहों तक सीमित रहना पड़ा।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना की ओर से दिखाई गई तैयारी ने यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर समुद्र से पर्याप्त बल भी तैनात कर सकता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में शुरू किया गया था, जो अप्रैल में हुए पहलगाम आतंक हमले के बाद किया गया। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। नौसेना प्रमुख ने कहा कि आज गैर सरकारी समूह और संगठन भी हिंसा और हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पहले केवल सरकार के स्तर पर देखा जाता था।