ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने अहम भूमिका निभाई। पाकिस्तान के हवाई खतरों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब, सेवानिवृत्त वायु मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान इन एस-400 प्रणालियों का पता लगाने के लिए बेहद बेताब था। इसके लिए पाकिस्तान ने मई 2025 के दौरान भारत के भीतर जासूसों और स्लीपर सेल को सक्रिय कर दिया था।
क्यों खास है एस-400?
क्या सेना को युद्ध के दौरान कोई निर्देश मिले थे?
एयर मार्शल ने आगे कहा, 'हमें यह निर्देश यह था कि कोई भी जान-माल का नुकसान नहीं होना चाहिए। हम नहीं चाहते कि आम नागरिक प्रभावित हों। केवल आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को ही इसका दंड मिलना चाहिए। हम युद्ध भड़काने वाला देश नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'कोई प्रतिबंध नहीं था। युद्ध कैसे लड़ना है, यह तय करने का अधिकार सेना को ही दिया गया था।' यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्ष ने बार-बार आरोप लगाया है कि सरकार ने सशस्त्र बलों के हाथ बांध दिए थे।
पूजा स्थलों को भी निशाना बनाने की कोशिश की
पाकिस्तानी सेना ने नागरिक क्षेत्रों और गुरुद्वारों सहित पूजा स्थलों को भी निशाना बनाने का प्रयास किया। तब यह निर्णय लिया गया कि भारत इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय वायु सेना ने सबसे पहले जमीनी रडारों और कमान एवं नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की हवाई गतिविधियों का पता लगाने और समन्वय करने की क्षमता को ध्वस्त कर दिया।
एस-400 ऑपरेटर ने क्या सवाल पूछा?
वे सिर्फ हवाई रडार के जरिए ही देख सकते थे। मेरे एस-400 ऑपरेटर ने मुझसे पूछा कि क्या वह गोली चला सकता है। मैंने कहा, चलाओ। और जैसे ही उसने गोली चलाई, हमने उसे 314 किलोमीटर की दूरी पर मार गिराया। यह सैन्य इतिहास में सबसे लंबी दूरी से हवा में मार करने का रिकॉर्ड है।