चीन की मदद से तस्वीरों में की छेड़छाड़
साइमन ने बताया कि कैसे पाकिस्तान ने चीनी सैटेलाइट फर्म की मदद से ली गई तस्वीरों से छेड़छाड़ और हेरफर कर झूठी तस्वीरें पूरी दुनिया को दिखाईं। साइमन ने कहा कि समीक्षा करने पर पता चला कि यह तस्वीर संघर्ष से पहले की है। इन तस्वीरों में नियमित रखरखाव से गुजर रहे मिग-29 को दिखाया गया था। इंजन के बार-बार परीक्षण के चलते मौके पर कालिख बनी थी, जबकि पाकिस्तान का कहना था कि यह राख हमले के बाद की है।
इसी तरह भुज में भारतीय एस-400 रडार सिस्टम को नष्ट करने का दावा करते हुए पाकिस्तान ने एक और तस्वीर प्रसारित की। तस्वीर में सैन्य बेस एप्रन पर काले धब्बे दिखाई दे रहे थे। विश्लेषण करने पर पता चला कि ये तेल के धब्बे या वाहन रखरखाव यार्ड से ईंधन रिसाव थे। यह तस्वीर भी भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव से काफी पहले खींची गई थी और इसका किसी हमले से कोई संबंध नहीं था।
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जम्मू के एयरपोर्ट पर हमले का दावा भी झूठा
इसी तरह नलिया एयरबेस और जम्मू के एयरपोर्ट पर हमले का दावा भी झूठा निकला। साइमन ने बताया कि श्रीनगर एयरपोर्ट पर नागरिक एप्रन को दिखाने वाली धुंधली छवि का इस्तेमाल बम से हुए नुकसान का संकेत देने के लिए किया गया। अलग-अलग दिनों में ली गई कई स्पष्ट सैटेलाइट छवियों से साइट में कोई बदलाव नहीं दिखा। पाकिस्तान की ओर से फैलाई जा रही छवि गलत तरीके से पेश की गई थी। इसी तरह पाकिस्तान ने नलिया एयरबेस की एक तस्वीर प्रसारित की, जिसमें रनवे के आसपास की मिट्टी काली होती दिखाई दे रही थी, जो बमबारी का संकेत देती है। हाई-रिजॉल्यूशन हमले के बाद की तस्वीरों की समीक्षा करने पर पुष्टि हुई कि साइट पर कोई हमला नहीं हुआ है। नुकसान की तस्वीर के ऊपर बादल की छाया थी। एअरबेस का बुनियादी ढांचा पूरी तरह से सुरक्षित है।