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Exclusive: पूर्व BSF DIG दुबे बोले- 26/11 के बाद ही होना चाहिए था ऑपरेशन सिंदूर, पड़ोसी के पास आतंकियों की फौज

Sun, 11 May 2025 07:26 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में कहा है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में आतंकवादियों की पैरलल आर्मी चल रही है। वहां कई मिसगाइडेड मिसाइल हैं जिनका ट्रिगर उनके हाथ में भी नहीं है। हमको सतर्क रहना पड़ेगा। हम कहीं भी ढीले नहीं पड़ सकते।
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नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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ऑपरेशन सिंदूर के करीब 88 घंटे बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा हुई। इसके चंद घंटे बाद ही पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग और देर रात पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान के क्या मायने हैं? आने वाले समय में भारतीय सेनी की क्या रणनीति होनी चाहिए? पहलगाम और 2008 में मुंबई में हुई 26-11 जैसी आतंकी वारदात के बाद सुरक्षाबलों को कैसी सतर्कता  बरतनी चाहिए? पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना ने जैसी कार्रवाई की है, इसका कितना असर हुआ है? ऐसे तमाम सवालों पर  अमर उजाला ने बीएसएफ के पूर्व डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे से बात की। पढ़िए उनसे हुई बातचीत के अंश...

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सवाल- सात मई को भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद 10 मई की शाम सीजफायर लागू होने की घोषणा हुई। चंद घंटे बाद ही पाकिस्तान ने समझौता का उल्लंघन किया है। इसके क्या मायने हैं?
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अचानक हुआ संघर्ष विराम उल्लंघन चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे अमेरिका काम कर रहा था। बारामूला और श्रीनगर में ड्रोन देखे गए हैं, अचानक हुई ये घटना चौंकाने वाली है। श्रीनगर सिटी में हुई घटना विचलित करने वाली है। सभी लोग कयास ही लगा रहे हैं कि ऐसा कैसे हुआ। ग्राउंड रिपोर्ट है कि उल्लंघन हुआ है। दोनों पक्षों से आधिकारिक बयान नहीं आया है। एलओसी पर छोटी-मोटी घटना हो सकती है, लेकिन  ये भी नहीं होनी चाहिए। इसे नजरअंदाज किया जा सकता है। लेकिन श्रीनगर सिटी में हुई घटना चौंकाने वाली है। खुद मुख्यमंत्री का बयान आया है। मैंने खुद ग्राउंड पर वेरिफाई किया है। घटना बिल्कुल सही है। सवाल ये है कि ऐसा क्यों हुआ। कुछ लोग कयास लगा रहे थे कि टेक्निकली जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का अलग स्टैंड रहा है। कहीं वो इसका लाभ उठाने की ताक में तो नहीं है। लेकिन बाड़मेर में ड्रोन दिखने के बाद ब्लैकआउट होना चौंकाने वाला है। कोई भी इसके निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। इसका विश्लेषण किया जा रहा है।

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नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: कई लोग इस घटना के बाद कह रहे हैं कि पाकिस्तान की प्रवृत्ति ही यही है। अमेरिका समझौते के लिए दबाव बना रहा होगा, ऐसे में उसके आगे झुकने की जरूरत नहीं है। अब पाकिस्तान ने सीजफायर तोड़कर कड़ी कार्रवाई का मौका दे दिया है। आपका क्या मानना है?

कुछ खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान जिसे नॉन-स्टेट एक्टर कहता है, वो मुख्य भूमिका में दिखता है। आतंकी को अगर राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक करते हैं तो इसे क्या कहा जाए? उन्होंने कहा नॉन स्टेट एक्टर वह है जिससे सरकार का कोई सरोकार न हो। लेकिन बहावलपुर  और मुरीदके में मारे गए आतंकियों की डेडबॉडी को अगर राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर रहे हैं, तो इन्हें नॉन स्टेट एक्टर नहीं कहा जा सकता।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: सीजफायर का उल्लंघन होने के बाद भारत आगे क्या करेगा?

-  भारी गोलाबारी हो रही है। उसका जवाब भी दिया जा रहा है। ग्राउंड फोर्सेज हमारी-आपकी तरह पुष्टि नहीं करेंगी। वे 4 का जवाब 14 से दे रहे हैं। बीते चार दिन में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। पहली ये कि संघर्ष चल रहा है। दूसरा सीजफायर हुआ, उसके बाद सीजफायर तोड़ा गया। परिस्थितियों का पोस्टमार्टम हो रहा होगा, जल्द ही चीजें सामने आएंगी। सुरक्षाबलों को इस बात का पता नहीं था कि सीजफायर होगा। ऐसे में उन्होंने तो अपनी बैरल गरम कर रखी है, इसलिए मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में क्या हुआ है पिछली रात कितनी तबाही हुई है, पाकिस्तान को अच्छे से पता है। आम लोगों को बहुत चीजें नहीं पता हैं, लेकिन पाकिस्तान ने सीजफायर की बात यूं ही नहीं की है। जब उनका एफ-16 खतरे में पड़ गया, चकलाला से लेकर सरगोधा और रहमियार खान में कार्रवाई हुई। भारतीय सेना ने उनके कुएं की गहराई नाप ली। इसके बाद पड़ोसी को एहसास हो गया कि भारत को हकीकत पता चल गई। ऐसी परिस्थियां क्यों बनीं, अब इस पर विचार चल रहा है।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: पाकिस्तान ने ऐसे ही घुटने नहीं टेके? हमने बता दिया कि भारतीय सेना की पहुंच कहां तक है। सेना एक का जवाब 4 से देने में सक्षम है। साढ़े तीन बजे फोन आया जिसके बाद संघर्षविराम की बात हुई।

पाकिस्तान दो ही चीजों को लेकर धमकाता था। एक एफ-16 और दूसरा परमाणु था। अगर न्यूक्लियर था तो पांच-छह दिन हो गए, अब तक छोड़ देना चाहिए था। आपका एफ-16  जहां रखा था, हमारी मिसाइल वहां तक पहुंच गई। पूरी बमबारी एरियल है। ऐसे में उन्हें अंदाजा लग गया कि उनके असेट कितने सुरक्षित हैं। एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तबाह हो चुका है। वे एक भी चीज नहीं गिरा सके। भारत ने जैसा इरादा किया, उस तरह टेरर साइट्स को अटैक किया। जब उन्होंने हमारे नागरिकों को निशाना बनाने का प्रयास किया तो  भारत ने पाकिस्तान के सभी एसेट्स नाकाम कर दिए। इनका एयर डिफेंस सिस्टम संभाल नहीं पाया। सरगोधा और रहमियार खान की नाकामी है। सारी चीजें एक्सपोज हो गईं। भारत ने नई लकीर खींची है। 

रणनीतिक अहमियत समझाते हुए दुबे ने कहा, सरगोधा थोड़ा आंतरिक जगह पर है। यहीं एफ-16 रखे गए हैं। भारत के एसेट्स यहां तक भी पहुंच गए। शनिवार सुबह सात जगहों पर हुआ है। पांच बजे के करीब 192 किलोमीटर की लैंड बाउंड्री पर जमकर गोले पड़े हैं। उनको पता है। नुकसान के बारे में पाकिस्तान कुछ कहेगा नहीं। वे तो जनता को यही बताएंगे कि यहां कुछ हुआ ही नहीं। वे तो आतंकियों को राष्ट्रीय झंडे के साथ सुपुर्द-ए-खाक करने में लगे हैं, ऐसे देश का क्या कहना।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: सोशल मीडिया पर जनभावनाओं और दर्शकों-पाठकों की प्रतिक्रियाएं देखने के आधार पर एक सवाल। आप फ्रंड से लीड करने वाले सैनिक रहे हैं। कई ऑपरेशंस में जांबाजी से लीड भी किया है। सेना का शौर्य संदेह से परे है। सैनिक मजबूत हैं, लेकिन समझौते की टेबल पर हम हार जाते हैं। क्या जब संघर्ष विराम की बात आई तो क्या आपको मायूसी लगी। सेना तैयार है, लेकिन समझौते की टेबल पर कहीं न कहीं हम कमजोर पड़ जाते हैं।

इस पर मिली जुली भावनाएं हैं। जो आप कह रहे हैं वो भी एक फैक्टर है। आर्म्ड फोर्स के नुमाइंदे के तौर पर वे कह रहे हैं कि 1965 में अगर भारत ने ताशकंद में पाकिस्तान को हाजी पीर वापस नहीं किया होता तो आज हम इनके सिर पर बैठे होते। 1971 में अगर 93000 सैनिकों को वापस नहीं लिया होता तो शायद आज पीओके भारत के पास होता। कहने का मतलब ये है कि इन बातों पर विचार हर काल में और हर युद्ध के समय चला है। किन परिस्थितियों में सेना के अधिकारी और नेतृत्व समझौते की टेबल पर बैठा? भू-राजनीतिक परिस्थियां कैसी थीं? क्या मजबूरियां थीं? भारत की क्या नीतियां थीं? तमाम पहलुओं को देखते हुए फैसले लिए जाते हैं। 

वर्तमान में जिस तरह का काम पाकिस्तान ने किया है, पहलगाम में जैसी नृशंस हत्या हुई है। जिस तरह देश ने पाकिस्तान के साथ चार  लड़ाइयां लड़ी हैं। इसे लेकर लोगों के दिलो-दिमाग में गुस्सा है। मन में प्रतिशोध की भावना है। मन में ये है कि पाकिस्तान अगर ऐसे ही करता रहेगा तो हम कब तक आपसे बातें करते रहेंगे, जनता काफी गुस्से में है। लोगों के विचार आ रहे हैं कि हम बुद्ध के देश के जरूर हैं, लेकिन इस बार हम पूरे युद्ध के मूड में थे। ऐसे में सवाल ये है कि सरकार जनभावनाओं के आधार पर फैसले नहीं करती। उसे निर्णय लेने से पहले लाभ-हानि देखना होता है। सरकार ने सेना को खुली छूट दी थी। विपक्षी दलों ने भी पूरा समर्थन दिया। संतुलित जवाबी कार्रवाई सेना की नीति रही है। ऐसे में भारत ने नौ आतंकी ठिकानों को बर्बाद करने के लिए चुना गया। इनमें 21 कैंप थे। भारत ने एक ही रात में इनको टारगेट बनाया। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी परेशानी ये थी कि बहावलपुर और मुरीदके में भारतीय सेना हमला करेगी, उसने इसकी कल्पना नहीं की थी। इन्हीं दोनों जगहों पर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के मुख्यालय थे। इसका मतलब है कि पाकिस्तान के दिल पर प्रहार हुआ है। उसके इनर कोर हार्ट पर प्रहार हुआ है, जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी। आज तक भारत ने भी जवाबी कार्रवाई के दौरान पीओके को क्रॉस नहीं किया था। बालाकोट में भी ऐसा नहीं हुआ। तत्कालीन नेतृत्व की जो भी नीतियां रही हों। सेना ने पीओके को टच करने का नहीं सोचा था। मारने का सबसे अच्छा टाइम 26/11 था। हमारे 172 लोग मुंबई में मारे गए थे। तब हमने ये काम नहीं किया। ये जो काम अभी हुआ है न ऑपरेशन सिंदूर, ये 26-11 के समय होना चाहिए था। इसी लश्कर ए-तैयबा ने 26-11 हमले को अंजाम दिया था यही पहलगाम हमले में भी शामिल रहा था। 16 साल बाद लश्कर की लीडरशिप बचती नहीं। ये लीडरशिप 2009 में खत्म होनी चाहिए थी, लेकिन 2025 तक जिंदा रही अब उनकी लाशें बहावलपुर जैसी जगहों से आ रही हैं।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल : बहुत महत्वपूर्ण बात और टिप्पणी। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने सामने से सबकुछ देखा है, वे कह रहे हैं कि शायद भारत ने ऐसी प्रतिक्रिया में देर की। 26-11 के मुंबई हमले में हमने 172 लोगों को खोया।

मुंबई हमले से बड़ी कौन सा अवसर था। ये बताइए। पाकिस्तान से अरब सागर के रास्ते आए 6-8 लोगों ने 26-11 हमले में पूरे देश की आर्थिक राजधानी को हिला दिया। पूरे मुंबई में ताज होटल, लियो पोर्ट कैफे, चौपाटी जैसी जगहों पर लोगों की हत्या कर खुद भी मरते हैं उस समय हमारा कोई रिस्पॉन्स नहीं था।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: देश की जनता के मन में भी इस बात को लेकर दर्द है कि उस समय हमने तीखी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। अमेरिका में 9-11 के बाद ऐसा दूसरा हमला नहीं हो, इसके लिए चाक-चौबंद सुरक्षा बंदोबस्त करने वाला देश, 10 साल बाद पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन-लादेन को मारने वाला अमेरिका आज हमें शांति का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहा है।  खुद पर हो जाए तो आतंकवाद, खुद तो बदला लेने में कोई कसर नहीं छोड़ता और हमें शांति का पाठ सिखाता है अमेरिका?

 जितने विकसित, यूरोपीय और पश्चिमी देश हैं उन्होंने आतंकवाद के प्रति दोहरा मानदंड अपनाया है। उनका नजरिया अलग रहा है ये बात किसी से छिपी नहीं है। दूसरी बात ये कि अपने घर की आग खुद ही बुझानी पड़ती है। दूसरा आदमी बाल्टी का पानी लेकर आएगा भी दो बहुत देरी से आएगा। और आपके पानी का ही इस्तेमाल करेगा। अमेरिका के बारे में आपने जो कहा वो ठीक है। अमेरिका में भी अलग-अलग राष्ट्रपतियों के दौर में एप्रोच और अलग-अलग  नीतियां रही हैं। अटलांटिक के पार जब अमेरिका एशिया की तरफ देखता है तो वह उसकी व्याख्या अपने तरीके से करता है। गुड और बैड टेररिज्म तो बहुत पहले से रहा है। जो सूट नहीं करता उसके लिए दूसरी बात कही जाती है। 9-11  तक अमेरिका को लगता था कि दुनिया में आतंकवाद है ही नहीं। लेकिन खुद के घर की इमारत हिली, जब WTO ध्वस्त हुआ तब अमेरिका को पता लगा कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यह टर्निंग प्वाइंट भी रहा है। इन देशों का डबल स्टैंडर्ड रहा है, ये बात सही है लेकिन अभी परिस्थितियां बदली हैं। अब इंटरनेशनल कम्युनिटी इस बात को लेकर आगे आने लगी है कि गलत को गलत कहा जाए, लेकिन अभी भी सुधार की बहुत गुंजाइश बाकी है।

नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: आप बीएसएफ से जुड़े रहे हैं। सीमा पार से होने वाली गोलाबारी में आठ जवान घायल हुए हैं। एक बीएसएफ जवान (सब इंस्पेक्टर) का बलिदान भी हुआ है।

बलिदानी जवान का पार्थिव शरीर भेजा जा रहा है। 192 किमी जम्मू की सीमा है। 750 किमी एलओसी है। आपको पता है कि जम्मू की पूरी सीमा पर बीएसएफ 1965 से तैनात है। एलओसी पर भी सेना के साथ बीएसएफ 16 बटालियनें तैनात हैं।  यह एक ऐसी फोर्स है, जिसने पाकिस्तान सीमा को एक मिनट के लिए भी नहीं छोड़ा है। बीएसएफ जवान अपनी नौकरी के पहले दिन की शुरुआत भी यहीं से करता है औऱ रिटायरमेंट भी यहीं से होती है क्योंकि शांतिकाल में बीएसएफ की कोई ड्यूटी नहीं है। इसकी कोई ऑपरेशनल ड्यूटी भी नहीं होती। इस एरिया की एक-एक चीज पता होती है। सीमा पार के हालात की जानकारी भी होती है। पाकिस्तान के रिस्पॉन्स का पैटर्न भी पता होता है। ऑपरेशन सिंदूर में बीएसएफ जवानों ने गौरवशाली काम किया है। जम्मू सीमा पर 81 मिमी मोर्टार और जितने मीडियम और लॉन्ग रेंज हथियार हैं, पाकिस्तान के जवाब में उनका पूरा और प्रभावी इस्तेमाल किया गया है। जैश-ए-मोहम्मद के सात आतंकी सांबा में घुसपैठ का प्रयास करते मारे गए। तीन लॉन्चिंग पैड भी ध्वस्त कर दिए गए। किसी भी पोस्ट पर रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं पड़ी है। ये जवानों की नॉर्मल ड्यूटी का हिस्सा है। मैंने खुद उनसे बात की है, जवानों का कहना है कि वे सामान्य तरीके से अपना काम कर रहे हैं। बीएसएफ पेशेवर तरीके से अपना काम कर रही है।
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नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : Amar Ujala
सवाल: सरकारी सू्त्रों ने सीमा पर गोलीबारी थमने की सूचना दी है। अचानक सबकुछ सामान्य होता दिख रहा है। तेजी से बदलते हालात काफी दुविधा पैदा हो रही है। ऐसे में क्या पाकिस्तान के भीतर आंतरिक कलह जैसा कुछ संकेत मिलता है।

ये मिसअंडरस्टैंडिंग नहीं लगती। ये जानबूझकर की गई हरकत है। अब किन तत्वों ने ऐसा किया, किन कारणों से हुआ, तमाम बातों की जानकारी शीर्ष तक गई होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद शाम करीब पांच बजे पोस्ट कर सीजफायर की बात कही। घटनाएं रोचक हैं। अभी हम सब कयास लगा रहे हैं, वास्तविक तथ्य और पूरी सच्चाई जरूर सामने आएगी। हमारी तैयारी संघर्ष विराम के किसी भी उल्लंघन को लेकर है। टकराव बढ़ सकता है। बीएसएफ जवान किसी भी परिस्थिति से निपटने को तैयार हैं। पाकिस्तान के कई ऐसे तत्व हैं, जो खुद उनके भी नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने आतंकवादियों की पैरलल आर्मी बना रखी है। उसमें कई मिसगाइडेड मिसाइल हैं जिनका ट्रिगर उनके हाथ में भी नहीं है। हमको सतर्क रहना पड़ेगा। हम कहीं भी ढीले नहीं पड़ सकते।
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