पिछले साल भारत की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। मशहूर एविएशन विशेषज्ञ टॉम कूपर ने कहा है कि भारत ने पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके में मौजूद एक अहम परमाणु भंडारण स्थल पर हमला किया था, और इसी के बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की कोशिश शुरू की। हालांकि भारतीय वायुसेना ने पहले इस तरह के हमले से इनकार किया था, लेकिन कूपर का कहना है कि उनके पास कई सबूत हैं।
यह भी पढ़ें -
Indus-Ravi: पाकिस्तान को दोहरा झटका देने की तैयारी, सिंधु के बाद अब रावी का भी पानी रोकेगा भारत
क्या है टॉम कूपर का बड़ा दावा?
उनके मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स को निशाना बनाया था। यह जगह पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की अहम साइट मानी जाती है। उनका कहना है कि इस हमले के बाद पाकिस्तान की स्थिति बहुत कमजोर हो गई थी। इसी वजह से पाकिस्तान ने अमेरिका और भारत से संपर्क कर संघर्ष रोकने की कोशिश की। कूपर के अनुसार, यह हमला सीधा संदेश था कि भारत जहां चाहे, जब चाहे हमला कर सकता है।
भारत के हमलों को लेकर क्या हैं सबूत?
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में मिसाइलों के निशान (कॉन्ट्रेल) दिखाई देते हैं, जो पहाड़ी इलाके की ओर जाते हुए नजर आते हैं। इसके अलावा वहां के रडार स्टेशन से उठता धुआं भी हमले की ओर इशारा करता है। कूपर के अनुसार, भारत ने पहले पाकिस्तान के रडार सिस्टम को निशाना बनाया ताकि जवाबी कार्रवाई कमजोर हो जाए। इसके बाद भूमिगत स्टोरेज के प्रवेश द्वारों पर हमला किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में उनके निजी संपर्कों ने भी साइट पर हमले की पुष्टि की।
क्यों अहम है किराना हिल्स?
कूपर के अनुसार, यहां 20-24 परमाणु परीक्षण हो चुके हैं। इलाके में कई मजबूत बंकर और भूमिगत सुरंगें हैं। पास में पाकिस्तान एयरफोर्स का बड़ा बेस सरगोधा भी है। यहां न्यूक्लियर हथियार रखने की संभावना ज्यादा मानी जाती है।
युद्ध पर इसका असर
टॉम कूपर का कहना है कि पाकिस्तान का जवाबी ऑपरेशन पूरी तरह फेल हो गया था। उसके मिसाइल और ड्रोन भारत ने रोक दिए और कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी गिराए गए। इसके बाद भारत ने कई एयरबेस पर हमला किया। कूपर के मुताबिक, किराना हिल्स पर हमला 'निर्णायक मोड़' बना और इसके बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की कोशिश की।
किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ?
उनके अनुसार हमले में कई आधुनिक हथियार इस्तेमाल हुए। इसमें सुखोई-30 से ब्रह्मोस मिसाइल, राफेल से स्कैल्प मिसाइल और जैगुआर से रैंपेज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ये सभी हाई-प्रिसीजन हथियार थे और अलग से खास विमान की जरूरत नहीं थी।
यह भी पढ़ें -
IFR Milan: आज गरजेंगे मिग-29के, एलसीए तेजस और पी-8आई टोही विमान; राष्ट्रपति लेंगी अंतरराष्ट्रीय बेड़े की सलामी
'भारत के वायु रक्षा प्रणाली ने अहम भूमिका निभाई'
उन्होंने यह भी कहा कि इस हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव काफी बढ़ गया था और यही वजह बनी कि उसने संघर्ष रोकने की कोशिश शुरू की। कूपर का मानना है कि भारत का एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम इस पूरे संघर्ष में बहुत प्रभावी साबित हुआ, जिसने पाकिस्तान की मिसाइलों और ड्रोन हमलों को काफी हद तक नाकाम कर दिया।
भारत ने क्यों किया इनकार?
हालांकि, टॉम कूपर ने हैरानी जताई कि भारत ने आधिकारिक तौर पर इस हमले से इनकार क्यों किया। उनके मुताबिक, 'सबूत इतने साफ हैं कि इसे नकारना सूरज के उगने से इनकार करने जैसा है।'
अन्य वीडियो